हृदयाघात

हृदयाघात क्या हैं?
  • यह उस समय होता हैं, जब शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में रक्त का संचार अवरुद्ध हो जाता हैं,
  • 50 साल से ऊपर की आयु वाली या रजोनिवृत्त महिलाओं को इसका बहुत ज्यादा खतरा होता हैं,
  • हृदयाघात छाती में दर्द या बिना दर्द के भी हो जाता हैं,
  • अचानक सांस का चलना या दिल का काम करना बंद हो जाता हैं,
  • इसके गंभीर परिणाम से हृदयगति रूक सकती हैं,
  • धमनियों में गांठ या थक्का बनने के कारण रक्त की आपूर्ति अवरूद्ध हो जाती हैं।
किन कारणों से ऐसा होता हैः
  • कैल्शियम या कोलेस्ट्रॉल का जमाव
  • वंशानुगत कारक
  • तंबाकू के सेवन
  • मोटापा
  • उच्च रक्त चाप
  • भावनात्मक तनाव
  • धमनियों में सूजन की बीमारी
  • मानसिक आघात या दिल की बीमारी ।
हृदयाघात के लक्षण
  • छाती में दर्द होना
  • कंधे या हाथ में दर्द होना
  • सांस लेने में तकलीफ होना
  • बहुत ज़्यादा पसीना आना
  • छाती में जलन होना
  • मतली या उल्टी आना
  • पेट में दर्द होना ।


प्राथमिक चिकित्सा
  1. आराम करने का प्रयास करें
  2. तंग कपड़ों को ढीला कर दें
  3. यदि किसी दवा की आवश्यकता हैं तब वह लें
  4. दवा लेने के 3 मिनट के भीतर दर्द से राहत मिल जाती हैं
  5. यदि ऐसा नहीं होता, तब चिकित्सक की सलाह लें
  6. यदि आवश्यकता हैं, तब कृत्रिम श्वास दें
  7. हृदय फुप्फुसीय या पुर्नजीवन चिकित्सा (कार्डियोपल्मनरी रिसैसिटेशन /सी.पी.आर.) प्रदान करें
    1. यदि नाड़ी नहीं चल रही हैं तो
    2. छाती पर हथेली रखकर पम्प करें या बार बार हल्का दबाएं
  8. 15 बार पम्प करने के बाद रोगी के मुख में 2 बार कृत्रिम श्वास दें
  9. ऐसा तब तक करते रहें, जब तक सहायता के लिये एम्बुलेंस या चिकित्सक नहीं आ जाते ।
हृदयाघात की रोकथाम
  • स्वास्थ्य की नियमित जांच करवाते रहें
  • तनाव से बचें
  • धूम्रपान या शराब का सेवन करना छोड़ दें ।
  • समझदारी से भोजन का सेवन करें
  • अपने रक्तचाप या मधुमेह को नियंत्रित रखें
  • वज़न को नियंत्रित रखें ।