मधुमेह - पहचान कार्ड

श्री राव, एक मधुमेह रोगी हैं जो दिन में दो बार इंसुलिन लेते थे। उन्हें प्रति दिन लंबी सैर करने की आदत थी और उनकी रक्त शर्करा का स्तर अच्छी तरह नियंत्रित था। एक दिन सुबह सैर करते समय उन्हें हाइपोग्लाइसीमिया हो गया और वह बाग में बेहोश होकर गिर गये। आसपास के लोगों ने उनकी मदद करने के लिये, उनके बटुए की जांच कर उनके नाम और पते के बारे में पता लगाया। सौभाग्य से उनके बटुए में एक मधुमेह पहचान कार्ड मिला जो विधिवत भरा हुआ था। जो उनकी मदद करने की इच्छा रखते थे, उनके लिये यह जानकारी बहुत मूल्यवान साबित हुई, जिसके कारण उन्हें समय पर सटीक उपचार प्रदान कर के जान बचाई जा सकी।

मधुमेह पहचान कार्ड एक ऐसा कार्ड हैं, जिसमें व्यक्ति के बारे में जानकारी जैसे उसका नाम, पता, आपातकालीन संपर्क नंबर,डॉक्टर का नाम, फोन नंबर और इंसुलिन की कितनी खुराक कितनी दी जाती हैं, इत्यादि होती हैं। यदि इसे विधिवत तरीके से भरा जाये तो, मधुमेह के रोगी को समय पर उपचार देकर उनके जीवन को बचाने में इससे काफी मदद मिल सकती हैं। जो रोगी पाँच वर्षों से ज्यादा मधुमेह से पीड़ित हैं, उन्हें हमेशा इसे अपने पास रखना चाहिए।

कभी-कभी हाइपोग्लाइसीमिया के आघात के दौरान व्यक्ति ऐसी मानसिक स्थिति में नहीं होता हैं कि वह खुद को अभिव्यक्त कर सके या मदद की मांग कर सके। यह चिकित्सकीय व्‍यावसायिकों को भी आपातकाल स्थिति में सही उपचार प्रदान करने में मदद करता हैं।