मधुमेह रेटिनोपैथी का उपचार और रोकथाम

रक्त शर्करा के स्तर पर गहन नियंत्रण मधुमेह रेटिनोपैथी रोकने की प्राथमिक विधि हैं।

मधुमेह के नेत्र-संबंधी जटिलताओं को स्‍थगित करने का एकमात्र तरीका रक्त शर्करा का कड़ा नियंत्रण हैं। इसलिए, मधुमेह रेटिनोपैथी का प्राथमिक उपचार मधुमेह पर कड़ा नियंत्रण हैं। इसके अतिरिक्‍त, रक्तचाप और सीरम लिपिड के स्तर को यथासंभव सामान्य रखा जाना चाहिए।

मधुमेह रेटिनोपैथी के लिए दो सामान्य उपचार होते हैं-

लेजर फोटोकॉएग्यूलेशन - गंभीर मैक्युलेरेडीमा और अ प्रजननशील रेटिनोपैथीरेयर का उपचार लेजर सर्जरी के साथ किया जाता हैं, जिसे लेजर फोटोकॉएग्यूलेशन कहते हैं। लेजर फोटोकॉएग्यूलेशन एक दर्द रहित उपचार हैं जिसमें एक लेजर बीम को आंखों के माध्यम से लक्षित कर किसी भी नई रक्त वाहिकाओं को नष्ट किया जाता हैं और रिसाव करने वाली वाहिकाओं को बंद कर दिया जाता हैं। उपचार के दौरान, रोगी प्रकाश की उज्ज्वल चमक देख सकता हैं और प्रक्रिया के कुछ घंटों तक दृष्टि धूमिल हो सकती हैं। आंखों में कुछ परेशानी का अनुभव करना भी काफी संभव हैं। प्रजननशील रेटिनोपैथी के लोग इस सर्जरी के बाद कुछ पक्षीय (परिधीय) दृष्टि खो सकते हैं लेजर फोटोकॉएग्यूलेशन से रंग और रात की दृष्टि भी प्रभावित हो सकती हैं। यह प्रक्रिया मधुमेह रेटिनोपैथी का इलाज नहीं हैं। यह नयी रक्त वाहिकाओं के रिसाव को रोककर सिर्फ आगे दृष्टि के नुकसान को रोकती हैं। लेजर सर्जरी में 90% संभावना होती हैं कि मधुमेह प्रभावित व्यक्ति प्रमुख रूप से अंधेपन से बच जाए।

प्रक्रिया के बाद दृश्य सुधार की गारंटी नहीं हैं।

 फ्लोरेस्‍सेन एंजियोग्राफी का उपयोग लेजर उपचार की योजना के लिए किया जाता हैं। जब एक बार रेटिनोपैथी की प्रजनन चरण तक प्रगति करने के बाद, नुकसान के कारण को उलटना बहुत कठिन हैं।

विट्रेक्‍टॉमी - प्रजननशील रेटिनोपैथी वाले लोगों को हमेशा नए रक्तस्राव होने के खतरे होते हैं। विट्रीअस में अत्‍याधिक रक्तस्राव के मामलों में, विट्रेक्‍टॉमी नामक ऑपरेशन आवश्‍यक हो सकता हैं।

नेत्रगोलक के खोखले हिस्‍से में एक जेल की तरह का विट्रीअस ह्यूमर (नेत्रकाचाभ) नामक द्रव भरा होता हैं, जिससे नेत्रगोलक को आकार देने में मदद मिलती हैं। विट्रेक्टॉकस अक्सर स्थानीय एनेस्थिया या बेहोश कर किया जाता हैं। इस प्रक्रिया में, चिकित्सक आंख के श्वेत पटल (sclera) में एक छोटा चीरा लगाता हैं। एक छोटे उपकरण का उपयोग कर धूमिल कांच को हटाकर उसके स्‍थान पर वै‍कल्पिक vitreous के साथ बदल दिया जाता हैं। प्रक्रिया के बाद आंख लाल और संवेदनशील हो जाएगी और रोगी को आंख के बचाव के लिए थोडे समय के लिए आंख ढकने का कवर पहनना होगा। चिकित्सक संक्रमण रोकने के लिए दवा युक्त आई ड्रॉप भी निर्दिष्‍ट करता हैं। विट्रेक्‍टॉमी के बाद दृष्टि में धीरे-धीरे सुधार होता हैं, और विट्रीअस ह्यूमर (नेत्रकांचाभ) नामक द्रव  धीरे-धीरे बदल जाता हैं। गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त रेटिनोपैथी होने से पहले उन्नत रेटिनोपैथी वाले लोगों को उनकी दृष्टि में सुधार करने के अच्‍छे खासे मौके हो सकते हैं।