स्वाभाविक रूप से मधुमेह का इलाज कैसे करें?

मधुमेह आज दुनिया में सबसे आम विकारों में से एक है। विभिन्न शोधों और सावधानियों के बावजूद, कोई यह अनुमान नहीं लगा सकता कि मधुमेह से कौन पीड़ित होगा। प्रकार और गंभीरता के आधार पर, प्रत्येक मधुमेह रोगी को दवाएं दी जानी चाहिए।

यहां कुछ प्राकृतिक उपचार दिए गए हैं जो मधुमेह के रोगी में शर्करा के स्तर को कम करने में सहायक हो सकते हैं।

अंजीर के पत्ते- अंजीर के पत्ते आमतौर पर मधुमेह के इलाज में उपयोग किए जाते हैं। माना जाता है कि उनमें मधुमेह विरोधी गुण होते हैं, जो रक्त में शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करते हैं। अंजीर के पत्तों को सीधे खाली पेट चबाया जा सकता है या पत्तियों को पानी में उबाला जा सकता है और पानी को चाय की तरह पिया जा सकता है। नियमित रूप से सेवन करने से इंसुलिन की आवश्यकता कम हो जाती है।

मेथी- मेथी के बीज शक्कर कम करने वाले गुणों से भरपूर होते हैं। यहां तक कि इस पौधे की पत्तियों की सब्जी बनाकर नियमित रूप से सेवन किया जा सकता है। मेथी नियमित अंतराल पर लेने पर इंसुलिन निर्भरता को कम करती है। एक चम्मच बीजों को रात भर एक गिलास पानी में भिगोकर रख देना चाहिए और बीजों के साथ पानी को खाली पेट पीना चाहिए। पानी का सेवन करने के बाद अगले 30 मिनट तक कोई भी खाद्य पदार्थ या दवाइयाँ नहीं लेनी चाहिए। इस उपचार को प्रति सप्ताह 2 से 3 बार करने की सलाह दी जाती है।

दालचीनी- दालचीनी हर भारतीय खाना पकाने में इस्तेमाल किया जाने वाला एक आम मसाला है। स्वाद और सुगंध बढ़ाने वाले में इस मसाले में लाभकारी मधुमेह विरोधी गुण भी होते हैं । माना जाता है कि इसमें रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में इंसुलिन के समान गुण होते हैं। वांछित प्रभाव प्राप्त करने के लिए हर दिन आधा चम्मच दालचीनी पाउडर लेने की सलाह दी जाती है। इसे पाउडर बनाने के बजाय अपने प्राकृतिक रूप में भी चबाया जा सकता है।

अंगूर के बीज का सत्त- अंगूर के बीज विटामिन ई, फ्लेवोनोइड्स, लिनोलिक एसिड और ऑलिगोमेरिक प्रोएंथोसायनिडिन का एक समृद्ध स्रोत हैं। हाल के अध्ययनों ने मधुमेह के इलाज में इनकी प्रभावशीलता साबित की है। अंगूर के बीज पीस कर चूर्ण के रूप में कैप्सूल में रखे जाते हैं; व्यक्ति रक्त शर्करा के स्तर को कम करने के लिए प्रतिदिन 300mg तक ले सकता है।

जैतून का तेल- माना जाता है कि जैतून का तेल से रक्त के कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को कम करने में सहायता मिलती है। यह ब्लड शुगर स्तर को कम करने में भी मदद करता है। सभी खाद्य पदार्थों को जैतून के तेल के साथ पकाने से फायदे तुरंत नहीं मालुम होते हैं लेकिन इसका प्रभाव लंबे समय के बाद ही पता चलता है।

करेला- मधुमेह का सबसे प्राचीन उपाय हैं करेले के रस का सेवन, हर सुबह खाली पेट इस का सेवन करने से इसका प्रभाव अधिक होता हैं। कई लोग करेले को उबालने के बाद इसका रस पीना पसंद करते हैं। करेला सेवन करने के कई प्रकार हैं, इन्हें पका या तल कर, रोजाना भोजन के साथ सेवन किया जा सकता है। करेले का सेवन करते समय सतर्क रहें क्योंकि इससे हाइपोग्लाइसीमिया या निम्न रक्त शर्करा का स्तर भी हो सकता है।

विटामिन सी- आश्चर्य है कि मधुमेह के लिए विटामिन सी का उपयोग क्यों किया जाता है? हाल के शोधों में पाया गया है कि प्रतिदिन 600mg तक विटामिन सी का सेवन करने से रक्त शर्करा के स्तर को सामान्य करने में मदद मिल सकती है। पुराने मधुमेह रोगियों को प्रतिदिन विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए।

लहसुन- यह एक आम भारतीय शाक हैं जिन्हें मसाला भी माना जाता हैं और भारत में इसका इस्तेमाल रोजाना खाना बनाने में किया जाता है। लहसुन के कोलेस्ट्रॉल कम करने वाले प्रभाव से सभी वाकिफ हैं; लेकिन कम ही लोग इसके मधुमेह विरोधी प्रभाव के बारे में जानते हैं। माना जाता है कि लहसुन में पाये जाने वाले रासायनिक एलिसिन का हाइपोग्लाइसेमिक प्रभाव होता है।घृत कुमारी या ग्वारपाठा

घृत कुमारी या ग्वारपाठा- यह ज्यादातर घरों में उगाया जाने वाला एक बहुत ही सामान्य पौधा है। मानव शरीर के लिए इसके विभिन्न लाभ और उपयोग हैं। कॉस्मेटिक संपत्ति के लिए व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है, इसमें हाइपोग्लाइसेमिक विशेषताएं भी होती हैं। एलो वेरा का स्वाद थोड़ा कड़वा होता है, फिर भी यह शर्करा के स्तर को कम करने के लिए सिद्ध हुआ है। इसमें अनुत्तेजक या सूजन को कम करने वाले (एंटी-इंफ्लेमेटरी) गुण भी होते हैं जो घाव भरने में मदद करते हैं। स्वाद में सुधार के लिए इसे छाछ के साथ लेना सबसे अच्छा है।

नीम- नीम एक ऐसा पेड़ है जिसके बारे में माना जाता है कि इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण होते हैं, साथ ही इसमें एंटी-डायबिटिक गुण भी होते हैं। यह पाया गया है कि इंसुलिन आवश्यकताओं को 50 प्रतिशत तक कम करने में यह कारागर सिद्ध हुआ हैं।

भारतीय आंवला- यह आम आदमी के विटामिन सी से भरपूर फल हैं, इसमें हाइपोग्लाइसेमिक गुण भी बहुत होते हैं।आंवले को जब मौखिक रूप से लिया जाता है, तब सेवन के 30 मिनट के भीतर यह इंसुलिन को उत्तेजित करके शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करता है। आंवले के बीजों को पीसकर पाउडर के रूप में भी लिया जाता है, जो रक्त शर्करा के स्तर को धीमे-धीमे कम करने में बहुत असरदार होता हैं।

आम- माना जाता है कि आम के पेड़ की पत्तियों में मधुमेह विरोधी गुण होते हैं। भोजन के सेवन से कम से कम 60 मिनट पहले पत्ती के अर्क को लेने से वांछित प्रभाव देखा जा सकता है। यह आंतों में ग्लूकोज के अवशोषण को कम करने में मदद करता है, जो इसके मधुमेह विरोधी प्रभाव होने का कारण है।

पवित्र तुलसी- यह एक औषधीय पौधा है, जिसे प्राचीन काल से ही भारतीयों द्वारा पवित्र माना जाता है। इसकी पत्तियों के रस को सेवन करने की सलाह दी जाती है। रोजाना बगीचे से ताज़ी पत्तियाँ धोने के बाद खाने की आदत का शरीर पर गहरा प्रभाव पड़ता है। तुलसी के पत्ते रक्त शर्करा के स्तर में उल्लेखनीय कमी लाते हैं। इसके अलावा, इसकी पत्तियों में एंटी-स्ट्रेस, एंटी-अस्थमा, एंटी-बैक्टीरिया, एंटी-फंगल, गैस्ट्रिक एंटी-अल्सर, एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-वायरल, एंटी-ट्यूमर, एंटी-म्यूटाजेनिक और इम्यूनो-स्टिमुलेंट गुण भी होते हैं।

भिंडी- यह सबसे अधिक लोकप्रिय सब्जी हैं जो घुलनशील फाइबर से भरपूर है। यह आंत से ग्लूकोज के अवशोषण को धीमा करने में मदद करती है। एक भिंडी को बीच में से काट कर एक गिलास पानी में रात भर भिगो दें और फिर खाली पेट इस पानी का सेवन करें। एक महीने तक इसका सेवन करने से यह रक्त शर्करा के स्तर को काफी हद तक कम कर देती है।

बीन्स- बीन्स पाचन प्रक्रिया को धीमा करने में मदद करती है जिससे रक्त शर्करा के स्तर में वृद्धि को रोका जा सकता है। बीन्स पेट को परिपूर्णता का एहसास देते हैं और जिससे तृप्ति जल्दी होती है।

सोया- उन लोगों के लिए सोया एक वरदान है जिन को अनियंत्रित पुराना मधुमेह है। सोया में आइसोफ्लेवोन्स होते हैं जो शरीर को अच्छी तरह से पोषित रखते हुए रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करते हैं। यह वसा के संचय को भी रोकता है क्योंकि यह बहुत कम कैलोरी देता है। यह वजन घटाने के कार्यक्रम के लिए भी आदर्श है।

जामुन- यह एक मौसमी बेरी है जो साल भर उपलब्ध नहीं रहती है। जामुन के पेड़ की पत्तियां शक्कर के स्तर को कम करने में उपयोगी होती हैं। प्रतिदिन 100 ग्राम जामुन का सेवन रक्त शर्करा के स्तर में चमत्कार कर सकता है। जामुन का सेवन करने के बाद कई लोगों के गले में खराश हो जाती है इसलिये सावधानी बरतें।

सिरका- कई लोग अपने नियमित आहार में सिरका शामिल नहीं करते हैं। लेकिन यह भी़ मधुमेह रोगियों की रक्त में शर्करा की मात्रा को कम करने में मदद करता है। उन खाद्य पदार्थों में सिरका मिलाएं जो इस के साथ स्वादिष्ट या रुचिकर हो सकते हैं। भोजन से पहले दो चम्मच सिरका का सेवन ग्लूकोज के प्रवाह को कम करने में मदद करता है।

घोंघा- रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में घोंघा का कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं है। लेकिन, जिंक के समृद्ध स्रोत के रूप में, वे मधुमेह रोगियों में घाव भरने में मदद करते हैं। इसलिये मधुमेह रोगियों को बेहतर घाव भरने की उनकी क्षमता को बढाने के लिए उन्हें आहार में घोंघा को शामिल करने की सलाह दी जाती है।

पपीता- पपीते का रोजाना सेवन करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इसमें प्राकृतिक रक्त शर्करा नियंत्रण क्षमता होती है, जो मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद करती है। यह कैरोटीन और फ्लेवोनोइड के साथ विटामिन सी और एंटी-ऑक्सीडेंट का भी एक समृद्ध स्रोत है।

Post a Comment

Comments should be on the topic and should not be abusive. The editorial team reserves the right to review and moderate the comments posted on the site.



Medindia Newsletters

Subscribe to our Free Newsletters!

Terms & Conditions and Privacy Policy.