जो लोग कीट और कीटाणुओं से घृणा करते हैं, वे कोविड़-19 से बचने के लिये बेहतर स्वच्छता का पालन करते हैं !

कोविड-19 के बारे में लोगों की समग्र चिंताओं का मूल कारण उनकी रोगाणुओं से चिढ़ या घृणा का भाव और रोगाणु के फैलाव की चिंता हैं। जब हम किसी चीज़ के प्रति घृणा महसूस करते हैं, तो हमारी व्यवहारिक प्रतिक्रिया इससे बचने और इससे दूर होने की होती है, लेकिन विभिन्न लोगों की प्रतिक्रियायें भी अलग-अलग होती हैं।

जो लोग कीड़े और रोगाणुओं से चिढ़ते या घृणा करते हैं, वे लोग कोविड-19 महामारी के दौरान निवारक उपायों में अधिक संलग्न पाए गए हैं, जैसे कि लगातार हाथ धोना, एक दूसरे से दूरी बनाये रखना, चेहरा छूने से बचना और चेहरे पर मुखौटा पहनना।

  • उम्र, कथित जोखिम या राजनीतिक रुझान जैसे कारकों से अधिक कोविड़ की गंभीरता के बारे में चिंता और निवारक स्वास्थ्य व्यवहार में संलग्न वे ही लोग हैं, जो मनोवैज्ञानिक तौर पर रोगाणुओं से चिढ़ते हैं और रोगाणु-विक्षेपण के कारको से जुड़े हुये हैं।
  • वायरस होने की संभावना से प्रभावित वाले होने लोग जरूरी नहीं कि वे ही हो, जो निवारक व्यवहारों में संलग्न होते हैं और कोई भी हो सकते हैं।
  • प्रौढ़ों की कोविड़ के बारे में अधिक चिंता होती है, क्योंकि वे उच्च जोखिम क्षेत्र में आते हैं।
  • उच्च आय वाला वर्ग, शारीरिक दूरी बनाने में और साफ-सफाई पर ज्यादा जोर देते हैं, क्योंकि उनके पास सफाई संसाधनों की आपूर्ति भी अधिक होती हैं और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति के कारण वे घर से काम करने की क्षमता भी रखते हैं।

  • हाल ही में हुई इस महामारी को और सामान्य कथित स्वास्थ्य को कई निवारक स्वास्थ्य व्यवहारों के साथ जोड़ा गया हैं। हालांकि इसके व्यक्तिगत कारण अलग-अलग भी हो सकते हैं, जैसे कि दूसरों को बीमार होने से बचाने के लिए प्रेरणा या फिर इस महामारी के फलस्वरूप व्यक्तिगत सफाई की सजगता भी हो सकती हैं।
    स्रोत-आई.ए.एन.एस
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