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दाह या जलन


 दाह या जलना क्या हैं?  
  • ताप, रसायनों, बिजली, विकिरण के कारण लगने वाली चोटें
  • आग, उष्‍ण तरल पदार्थों और वाष्प के कारण सामान्‍य दाह या जलने की चोटें
  • ताप, रसायनों का त्वचा के संपर्क में आने के कारण दाह या जलना
  • गंभीर दाह या जलना मांसपेशियों, वसा और हड्डियों को प्रभावित करता हैं
  • विशेष रूप से इससे बुजुर्ग और बच्चे प्रभावित होते हैं।
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जलने की श्रेणियाँ
  • पहली, दूसरी और तीसरी श्रेणी (डिग्री)
  • इनका वर्गीकरण ऊतकों को हुई क्षति की गंभीरता पर निर्भर करता हैं
  • स्वयं उपचार का निर्णय लेने से पहले जले हिस्‍से के फैलाव की जांच करें
  • यदि जले हुए हिस्‍से का व्यास कुछ इंच से अधिक हैं या
  • इसमें हाथों, पैरों, चेहरे, जांघों या नितम्बों का काफी हिस्‍सा, या प्रमुख जोड़ शामिल हैं, तो मदद प्राप्‍त करें।
पहली श्रेणी(डिग्री) का दाह या जलना
  • क्षति हल्की या ऊपरी सतह पर होती हैं
  • घायल क्षेत्र में सूजन और लालिमा हो जाती हैं
  • दर्द होने लगता हैं
  • किसी प्रकार के छाले दिखाई नहीं देते
  • स्पर्श करने पर जला हुआ क्षेत्र सफेद पड़ जाता हैं
  • ठीक होने में 3 से 6 दिन लग जाते हैं।
उपचार
  • रोगी को जलने वाले स्रोत से हटा दें
  • जले हुए कपड़े उतार दें
  • जले अंग पर ठंडा पानी डालते रहें
  • प्रभावित अंग को धीरे से साफ करें
  • धीरे से सूखाएं
  • जैविकरोधी या एंटीबॉयोटिक लगाएं जैसे सिल्विर सल्फाड़ीऐज़ीन
  • जले हुए अंग को रोगाणुनाशक पटटी बांध कर ढक दें
  • यदि आवश्यक हो तो टेटनस का टीका लगाएं।
  द्वितीय श्रेणी (डिग्री) का दाह या जलना
  • दाह त्वचा की मध्यम परत तक फैल जाता हैं
  • सूजन, दर्द और लालिमा देखी जा सकती हैं
  • जले हुए अंग को स्पर्श करने पर वह सफेद हो सकता हैं
  • फफोले या छाले पड़ सकते हैं, जिनसे मवाद बह सकता हैं
  • त्वचा पर दाग पड़ सकते हैं
  • यदि चोट जोड़ों में लगी है, तब हिलाने से बचें
  • पानी की कमी या निर्जलीकरण भी हो सकती हैं
  • ठीक होने का समय चोट के फैलाव पर निर्भर करता हैं । 
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उपचार
  • प्रभावित अंग को अच्छी तरह साफ करें
  • धीरे से सुखाएं
  • प्रभावित अंग पर एंटीबायोटिक क्रीम मलें
  • रोगी को लेटा दें
  • शरीर के जले हुए अंग को ऊंचा उठा कर रखें
  • त्वचा प्रतिरोपण (ग्राफ्ट) की आवश्यकता हो सकती हैं
  • गतिशील होने के लिए भौतिक चिकित्सा या शारीरिक उपचार की आवश्यकता हो सकती हैं
  • प्रभावित जोड़ों को आराम देने के लिए पट्टी या स्प्लिंट का इस्तेमाल किया जा सकता हैं
  • अस्पताल में उपचार कराना आवश्यक हैं।
तीसरी श्रेणी (डिग्री) का दाह या जलना
  • त्वचा की तीनों परतों को क्षति या नुकसान पहुँचता हैं
  • आसपास के केशकूपों या रोमों, पसीने की ग्रंथियों और तंत्रिकाओं के सिरों को नष्ट कर देता हैं
  • नसों के नष्‍ट होने के कारण दर्द कम महसूस होता हैं
  • प्रभावित चोट क्षेत्र का स्पर्श करने पर सफेद नहीं होता हैं
  • किसी प्रकार के छाले या फफोले नहीं दिखते हैं
  • सूजन हो जाती हैं
  • त्वचा चमड़े की भांति रूखी, सख्त दिखाई देती हैं
  • त्वचा का रंग विवर्ण होने लगता हैं
  • दाग धब्‍बे होने लगते हैं
  • रक्‍त संचार की दुर्बलता से पपड़ीदार सतह (एस्कर) विकसित हो जाती हैं
  • पानी की कमी हो जाती हैं जिसके परिणामस्वरूप पीड़ित को सदमा या धक्का लगता हैं
  • समय के साथ लक्षण ओर अधिक खराब हो सकते हैं
  • विरूपता हो सकती हैं
  • स्‍वास्‍थ्‍य लाभ चोट के फैलाव पर निर्भर करता हैं
  • 90% शरीर के सतह की चोट, मौत में परिणत होती हैं
  • बुजुर्गों में 60% चोट, प्राणघातक हो सकती हैं।
उपचार
  • तत्काल अस्पतालीय देखभाल की आवश्यकता होती हैं
  • पानी की कमी का उपचार नसों में तरल दवा की आपूर्ति (ड्रीप्स) के माध्यम से किया जाता हैं
  • ऑक्सीजन दी जाती हैं
  • शल्य चिकित्सा द्वारा झिल्‍ली (एस्कर) निकाली जाती हैं
  • समय-समय पर जले हुए अंग पर साफ ठंड़ा पानी डालें
  • पौष्टिक आहार लेने से जल्दी स्‍वास्‍थ्‍य लाभ होने में मदद मिलती हैं
  • नियमित निगरानी आवश्यक हैं
  • मानसिक अवसाद का उपचार अवसादरोधी दवाई से किया जाता हैं।
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निवारण
  • अपने घर में धुएं का अलार्म लगायें
  • घर पर 'बच्चों के अनुकूल' सुरक्षा उपायों को स्थापित करें
  • खाना पकाते समय रेशमी (सिंथेटिक) कपड़े पहनने से बचें
  • घर और कार्यस्थल पर अग्निशमन का अभ्यास करें।