रीढ़ की हड्डी की चोट

अवलोकन
  • रीढ़ की हड्डी की चोट को 'मायलोपैथी' भी कहा जाता हैं
  • चोट के परिणाम स्वरूप रज्जु के तंत्रिका फाइबर को क्षति पहुंचती हैं
  • शारीरिक अनुभूति और गतिशीलता का नुकसान हो सकता हैं
  • अधिकांश चोटों में रीढ़ की हड्डी अक्षुण्ण (संलग्न) रहती हैं
  • पूर्ण चोट के कारण नीचे के भाग में कोई गतिविधि या अनुभूति नहीं होती हैं
  • अपूर्ण चोट में - नीचे के भाग में मामूली गतिविधि या अनुभूति कायम रहती हैं
  • शारीरिक उपचार, वेंटिलेटर(कृत्रिम साँस यत्र), व्हील चेयर की आवश्यकता होती हैं ।
कारण
  • वाहन दुर्घटनाएं
  • गोताखोरी और डुबकी की दुर्घटनाएं
  • गिरना
  • बंदूक की गोली लगने से
  • इस जैसी स्थितियों में

    अ. पोलियो

    ब. फोडा या टयूमर

    स. द्विमेरूता (स्पिना बिफिडा)

    द. फ्रेडरिच का अटेक्सिया
(इस विकार में ऊपरी और निचले गतिजनक न्यूरॉन के ह्रास के कारण पूरे शरीर की मांसपेशियां कमज़ोर हो जाती हैं, जिस से प्रभावित व्यक्ति स्वैच्छिक गतिविधियों को नियंत्रित करने की क्षमता खो बैठते हैं।)

लक्षण
  • अनुभूति की क्षति
  • कार्य करने के वाली संचालन-तंत्रिकाओं की क्षति
  • आंत या मूत्राशय के कार्यों की क्षति
  • यौन क्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं
  • स्वचलित कार्यों करने में क्षति, जैसे श्वास लेना
  • दिल के धड़कन की दर को नियंत्रित करने में असमर्थता
  • पसीना आने में अक्षमता
  • पुराना दर्द
उपचार

जितनी जल्दी संभव हो सके चिकित्सा सहायता प्राप्त करें या एम्बुलेंस बुलाएं। इस दौरान -
  • यदि आस पास का परिवेश सुरक्षित नहीं हैं तो व्यक्ति को सुरक्षित जगह ले जायें
  • सिर, गर्दन और शरीर को पूरी तरह से स्थिर या अचल रखें
  • हिलाने डुलाने से रीढ़ का जोड़ अस्त व्यस्त या विस्थापित हो सकता हैं, जिसके कारण चोट या क्षति अधिक बढ सकती हैं
  • यदि साँस लेने का कोई संकेत नहीं हैं, तो पीड़ित को पुर्नजीवन चिकित्सा (सी पी आर) प्रदान करें
  • पुर्नजीवन चिकित्सा देने के दौरान सिर को पीछे ना झुकाएं ।
निवारण
  • ड्राइविंग करते समय हमेशा सीट बेल्ट पहनें
  • बच्चों और शिशुओं के लिए विशेष सीट बेल्ट का उपयोग करें
  • शराब पीकर वाहन मत चलाएं
  • कम गहरे पानी के कुंड या पूल में डुबकी मत लगाएं ।
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