मधुमेही-मोटापे के कारण

चूंकि मधुमेह उच्च रक्त शर्करा का एक विकार है, तार्किक रूप से रक्त शर्करा में कमी कर के, वास्तव में इस स्थिति का इलाज किया जा सकता हैं। लेकिन उच्च रक्त शर्करा केवल एक लक्षण है; यह टाइप-2 मधुमेह का कारण नहीं है।

मोटे तौर पर कहें तो, खराब खान-पान, जीवनशैली और पर्यावरण के विषाक्त पदार्थ इस विकार के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। शोधकर्ताओं ने अब ऐसे जीन की पहचान की है जो मधुमेह में योगदान करते हैं। उनके शब्दों में - 'इस विश्लेषण ... ने कई नए जीनों की पहचान की जिनकी अभिव्यक्ति में परिवर्तन मधुमेही-मोटापे के विकास में योगदान दे सकता है'। साथ में, उन्होंने यह भी पाया कि जीन अभिव्यक्ति में यह परिवर्तन 'प्रारंभिक वजन बढ़ने की प्रतिक्रिया में सबसे अधिक संभावित कारण है'। यह इस तथ्य की ओर इशारा करता है कि मधुमेह के लिए खराब आहार और जीवनशैली जिम्मेदार हैं।

तो, मधुमेह का वास्तविक कारण क्या है? इस प्रश्न का उत्तर है – इंसुलिन प्रतिरोध। इंसुलिन प्रतिरोध वह कारण है, जिससे मधुमेह विकसित होता हैं। फिर, इंसुलिन प्रतिरोध क्या है? यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन तो करता है, लेकिन इसका सही उपयोग नहीं कर पाता है। आम तौर पर, शरीर में मांसपेशियों और वसा कोशिकाओं को रक्त से ग्लूकोज या ऊर्जा पहुंचाने का काम इंसुलिन करती है। लेकिन अस्वास्थ्यकर या जंक फूड और शारीरिक निष्क्रियता हमारे शरीर में वसा कोशिकाओं को बढ़ाती है और इन कोशिकाओं को पूरा करने के लिए शरीर को अधिक इंसुलिन का उत्पादन करना पड़ता है। ये अतिरिक्त वसा कोशिकाएं साइटोकिन्स को उत्पन्न करती हैं जो सेल गतिविधियों को ऊतेजित करती हैं जो उन्हें इंसुलिन के प्रति अनुत्तरदायी बनाती हैं। धीरे-धीरे, कोशिकाएं इंसुलिन के प्रभावों के प्रति असंवेदनशील हो जाती हैं और वे इंसुलिन के प्रति कोई प्रतिक्रिया नहीं करती हैं। इसे इंसुलिन प्रतिरोध या रेजिस्टेंस के नाम से जाना जाता है।

इंसुलिन प्रतिरोध रक्तप्रवाह में इंसुलिन की अधिकता का कारण बनता है और इससे मधुमेह से जुड़ी सभी समस्याएं पैदा होती हैं। शरीर में उच्च इंसुलिन के स्तर से अत्यधिक भूख लगती है और मुख्य रूप से पेट के आसपास चर्बी जमा होने के कारण वजन बढ़ता है। ऑक्सीडेटिव तनाव, उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल, और निश्चित रूप से, टाइप -2 मधुमेह का विकास फिर से इंसुलिन प्रतिरोध का ही परिणाम है। इसे इंसुलिन प्रतिरोध सिंड्रोम, या मेटाबोलिक सिंड्रोम, या अब यह मधुमेही-मोटापे के रूप में जाना जाता है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज (NIDDK) इंसुलिन प्रतिरोध सिंड्रोम के लिए निम्नलिखित नैदानिक मानदंड की सिफारिश करता है:

  • पुरुषों के लिए कमर का माप 40 इंच या अधिक और महिलाओं के लिए 35 इंच या अधिक।
  • ट्राइग्लिसराइड का स्तर 150 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर (मिलीग्राम/डीएल) या उससे अधिक, या ट्राइग्लिसराइड के स्तर को ऊंचा करने के लिए दवा लेवे।
  • एचडीएल, या "अच्छा," कोलेस्ट्रॉल पुरुषों के लिए 40 मिलीग्राम / डीएल से नीचे और महिलाओं के लिए 50 मिलीग्राम / डीएल से नीचे, या निम्न एचडीएल के स्तर बनाने के लिए दवा लेवे।
  • रक्तचाप का स्तर 130/85 से अधिक या उसके बराबर, हो तो उच्च रक्तचाप के स्तर को नियंत्रित करने के लिए दवा लेवे।
  • उपवास रक्त शर्करा का स्तर 100 mg/dL या ऊपर, हो तो ऊंचे रक्त-ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करने के लिए दवा लेवे ।

स्वस्थ रहने के लिये अपना वजन अधिक न बढ़ने दें और अगर आप पहले से ही मोटापे की राह में हैं, तो जीवनशैली में बदलाव और स्वस्थ आहार के माध्यम से इससे छुटकारा पायें।

Post a Comment

Comments should be on the topic and should not be abusive. The editorial team reserves the right to review and moderate the comments posted on the site.



Medindia Newsletters

Subscribe to our Free Newsletters!

Terms & Conditions and Privacy Policy.