मधुमेह रेटिनोपैथी, मधुमेह की एक जटिलता हैं, जो कि आंख के रेटिना/ आँख के पीछे के पर्दा की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुँचाती हैं और गंभीर दृष्टि हानि या अंधेपन का कारण बनती हैं।
Diabetic Retinopathy


और अधिक जानकारी के लिए पढ़ें : मधुमेह, अनेक तरीकों से आंखों को प्रभावित कर सकता है। न्यूरोपैथी (परिधीय नसों की क्षति) और नेफ्रोपैथी (गुर्दे को नुकसान) के साथ-साथ मधुमेह रेटिनोपैथी, मधुमेह की जटिलता एक प्रमुख कारण हैं। मधुमेह रेटिनोपैथी, आमतौर पर दोनों आंखों को प्रभावित करता हैं। मानव की आँख तीन परतों में होती हैं। सबसे बाहरी परत को श्वेतपटल(स्कलेरा) कहा जाता हैं । आंख की बीच की परत को यूविया कहा जाता है, और अंतरतम परत को रेटिना कहा जाता हैं। रेटिना, आँख की प्रकाश - संवेदनशील झिल्ली हैं। जब प्रकाश आंख में प्रवेश करता हैं, तब कॉर्निया और लेंस प्रकाश को रेटिना की तरफ केंद्रित कर देते हैं। रेटिना का मध्य क्षेत्र, मैक्युला कहा जाता हैं, यह लाखों तंत्रिकाओं के अंतिम छोर का एक घनिष्ट पुलिन्दा/समूह हैं, जो कि दृश्य छवि के तीखेपन के लिए जिम्मेदार हैं। रेटिना, छवि को ईलैक्ट्रीकल ईमप्लस/विद्युतीय तंरगों में परिवर्तित करके, ऑपटिक नर्वस/ दृष्टि की तंत्रिकाओं द्वारा मस्तिष्क तक ले जाता हैं। इसलिए, रेटिना के बिना, आंख मस्तिष्क के साथ संवाद नहीं कर सकती और दृष्टि खो जाती हैं । मधुमेह रेटिनोपैथी- निम्न प्रकार से प्रभावित कर सकती है:
  • प्रकार 1 मधुमेह रोगियों की प्रारम्भिक किशोरावस्था में।
  • प्रकार 2 मधुमेह रोगियों की प्रारम्भिक वयस्कावस्था में।
  • मधुमेह पीड़ित गर्भवती महिलाओं में।

लगभग 90% मधुमेह व्यक्तियों में अंततः रेटिनोपैथी का कुछ डिग्री का विकास अवश्य होगा। औसतन, मधुमेह रोगियों में रेटिनोपैथी की शुरुआत होने में 10-20 साल लग जाते हैं। मधुमेह रेटिनोपैथी के कारण रेटिना परिवर्तन शुरू में लक्षण हीन हो सकता हैं । रेटिना की परीक्षा के आधार पर मधुमेह रेटिनोपैथी को दो चरणों में विभाजित किया जा सकता हैं । चरण इस प्रकार हैं-
  • ना फैलने वाली /नॉन प्रौलिफरेटिव मधुमेह रेटिनोपैथी: - छोटे गुब्बारे की तरह सूजन रेटिना की रक्त वाहिकाओं में विकसित होती हैं, इसे सूक्ष्म धमनी विस्फारक/ माइक्रोएन्य़ुरीस्म कहा जाता हैं । इस रोग की प्रगति होने पर, खून की कु्छ वाहिकाऍ अवरुद्ध हो जाती हैं। इसलिए रेटिना के कई क्षेत्र रक्त की आपूर्ति से वंचित हो जाने से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। । ये क्षतिग्रस्त क्षेत्र, रेटिना के पोषण के लिए, नई रक्त वाहिकाओं को विकसित करने के लिए शरीर को संकेत देते हैं।
  • फैलने वाली / प्रौलिफरेटिव डायबिटिक रेटिनोपैथी (पी डी आर): -इसमें नई रक्त वाहिकाओं का विकास शुरू होता हैं । बहरहाल, ये नई रक्त वाहिकाऎ असामान्य और नाजुक होती हैं; और कभी यदि ये वाहिकाऎ रिसने लगे तो गंभीर दृष्टि हानि कर सकती हैं।
रेटिनोपैथी के इलाज में रक्त शक्कर को नियंत्रित करना और शल्य चिकित्सा से द्रव के जमाव को लेसर से निकालना या विट्रेक्टमी शामिल हैं।
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