Diabetic Ketoacidosis

मधुमेह केटोएसिडोसिस (डीकेए) क्या है?

डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (डीकेए-DKA), मधुमेह रोगियों को होने वाली एक अनियंत्रित मधुमेह की एक जटिल गंभीर बिमारी है। यह समस्या शरीर में कीटोन्स नामक ब्लड एसिड की उच्च मात्रा के उत्पादन की स्थिति में होती है। यह तब विकसित होती है जब शरीर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन का उत्पादन नहीं कर पाता।

ग्लूकोज हमारे शरीर की कोशिकाओ, मांसपेशियों और अन्य ऊतकों के लिए ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है। पर्याप्त इंसुलिन के अभाव में हमारा लीवर, शरीर ईंधन के रूप में फैट या वसा का इस्तेमाल करना शुरू कर देता है। ऐसा आमतौर पर तब होता है, जब दो समय के भोजन के बीच ज़्यादा देर हो जाती है। इस प्रक्रिया के कारण रक्त में कीटोन्स नामक एसिड बढ़ने लगता है और यह ख़ून और पेशाब में जमा होने लगता है, इस स्थिति को डायबिटिक कीटोएसिडोसिस कहते है।

मधुमेह के रोगी में, विशेष रूप से टाइप 1 मधुमेह में यह तब होता है जब अग्न्याशय पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं करता है और यह अवस्था युवाओ में सामान्य है। दूसरी ओर, टाइप 2 मधुमेह, शरीर की कोशिकाओ द्वारा इंसुलिन के प्रभाव का प्रतिरोध करने के कारण होता है।

यदि शरीर में पर्याप्त इंसुलिन नहीं है, तो शरीर की कोशिकाएं ग्लूकोज के बजाय वसा का उपयोग करती हैं। वसा के जलने से कीटोन्स बढ़ते हैं, जो रक्त को अम्लीय बनाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप मेटाबोलिक एसिडोसिस या डायबिटिक कीटोएसिडोसिस नामक स्थिति उत्पन्न होती है। शरीर में कीटोन्स की उपस्थिति सांस को एक फल की गंध देती है जो स्थिति की चेतावनी के संकेत के रूप में कार्य करती है। मूत्र में अतिरिक्त कीटोन्स निकल जाते हैं।

किसी भी मधुमेह रोगी को पेट में ऐंठन के साथ दर्द होता है, जो उल्टी के साथ अचानक शुरू होता है, तो रक्त शर्करा के स्तर का तुरंत परीक्षण किया जाना चाहिए और यदि उच्च (>250 मिलीग्राम/ डेसीलीटर) हो तो, रोगी की डीकेए के लिए, जांच की जानी चाहिए।

मधुमेह केटोएसिडोसिस (DKA) के कारण क्या हैं?

आमतौर डीकेए के कारण, मधुमेह के रोगियों में किसी बीमारी या इंसुलिन थेरेपी की समस्या होती है। डीकेए के कारणों में शामिल हैं:

  • इंसुलिन पर निर्भर मधुमेह रोगियों द्वारा नियमित रूप से इंसुलिन की पर्याप्त खुराक ना लेना
  • इंसुलिन पंप जिसका उपयोग निरंतर इंसुलिन देने के लिए किया जाता है यदि उसमें कोई समस्या हो तो वह भी डीकेए का कारण बन सकता है
  • व्यक्ति जो टाइप 1 मधुमेह की उपस्थिति से अनजान हो
  • फेफड़ों में रक्त का थक्का बनना
  • मधुमेह के रोगी में मूत्र पथ का संक्रमण, गैस्ट्रोएंटेराइटिस, फ्लू या दंत फोड़ा जैसे अंतर्निहित संक्रमण
  • पेट की बीमारी होना
  • हृदय संबंधी स्थितियां जैसे हार्ट अटैक और स्ट्रोक
  • सर्जरी
  • भावनात्मक तनाव जैसी कोई तनावपूर्ण स्थिति
  • स्टेरॉयड या एंटीसाइकोटिक्स जैसी दवाओं का सेवन करना
  • अत्यधिक शराब का सेवन
  • अवैध नशीली दवाओं का सेवन।

डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (DKA) के लक्षण क्या हैं?

डीकेए के लक्षणों में शामिल हैं:

  • मतली और उल्टी होना
  • लगातार थकान महसूस होना
  • सरदर्द होना
  • ज़्यादा प्यास लगना
  • रूखी त्वचा होना और मुंह का सूखना
  • रूखी त्वचा होना और मुंह का सूखना
  • शरीर में पानी की कमी होना
  • बार-बार पेशाब आना या जाने की इच्छा होना
  • पेट में दर्द होना
  • सांस में दुर्गंध आना
  • गहरी और तेज़ी से सांस लेना
  • पेशाब में कीटोन का उच्च स्तर होना
  • ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाना
  • कुछ समझ में ना आना (ध्यान की कमी या भ्रम होना)या ध्यान देने में कठिनाई होना।

मधुमेह केटोएसिडोसिस (डीकेए) की जटिलताएं क्या हैं?

मधुमेह केटोएसिडोसिस जानलेवा जटिलताओं का कारण बन सकता है जिनमें निम्न शामिल हैं:

  • गंभीर निर्जलीकरण के परिणामस्वरूप हाइपोवोलेमिक शॉक (गंभीर रक्त या द्रव हानि)
  • निम्न रक्त पोटेशियम का स्तर जो गंभीर पेट और अंगों में ऐंठन का कारण बनता है, और हृदय को प्रभावित कर सकता है
  • गुर्दे की तीव्र विफलता
  • सेरेब्रल एडिमा (मस्तिष्क की सूजन) जिसके परिणामस्वरूप भ्रम, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, दौरे और परिवर्तित चेतना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं
  • फेफड़ों में द्रव जमा होने के कारण
  • एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम।

डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (DKA) का निदान कैसे करते हैं?

डीकेए का निदान रोगी की नैदानिक स्थिती और कई जांचों के आधार पर किया जाता है। रोगी की स्थिरता को निर्धारित करने और द्रव प्रतिस्थापन का निर्णय लेने के लिए रक्तचाप की नियमित रूप से निगरानी की जानी चाहिए। यदि डायबिटिक कीटोएसिडोसिस का संदेह होता है, तो शारीरिक परीक्षण के साथ-साथ खून की जाँच की जाती है। कुछ मामलों में, डायबिटिक कीटोएसिडोसिस को उकसाने वाली स्थितियों के बारे में जानने के लिए अतिरिक्त परीक्षणों की आवश्यकता हो सकती है।

1. मूत्र में कीटोन परीक्षण: डिपस्टिक परीक्षण द्वारा मूत्र में कीटोन्स की उपस्थिति का परीक्षण किया जाता है। एक डिपस्टिक को जो एक तरह के खास रसायन से लेपित होती है, रोगी के मूत्र के नमूने में डुबोया जाता है। डिपस्टिक का रंग परिवर्तन होना, कीटोन्स की उपस्थिति को इंगित करता है।

2. रक्त परीक्षण: कीटोएसिडोसिस के परीक्षण के लिए किए जाने वाले खून की जाँच के दौरान निम्न स्तरों पर ध्यान दिया जाता है:-

  • धमनी रक्त गैस परीक्षण या आर्टेरियल ब्लड गैस टेस्ट (एबीजी) : धमनी रक्त गैस का माप रक्त के नमूने के आधार पर किया जाता है। 7.3 से कम पीएच और बाइकार्बोनेट का निम्न स्तर, डीकेए के रोगियों को इंगित करता है। परिणामों के आधार पर, डीकेए को हल्के, मध्यम या गंभीर रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।
    • मध्यम डीकेए -पीएच - 7.00-7.24, बाइकार्बोनेट - 10- <15meq/l
    • गंभीर डीकेए - पीएच - < 7.00, बाइकार्बोनेट - <10meq/l
  • रक्त ग्लूकोज परीक्षण: यदि शरीर में पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं है, जिससे ग्लूकोज, कोशिकाओं में प्रवेश कर सके तो ऐसी स्थिति में रक्त में शुगर का स्तर बढ़ जाता है। जैसे-जैसे शरीर ऊर्जा के लिए वसा और प्रोटीन का विभाजन करता है उसी के आधार पर ब्लड शुगर का स्तर भी बढ़ता है। रक्त ग्लूकोज का परीक्षण घर पर ग्लूकोमीटर या प्रयोगशाला की सहायता से किया जा सकता है। होम ग्लूकोमीटर एक छोटा उपकरण है। रक्त की एक छोटी बूंद ग्लूकोमीटर के साथ प्रदान की गई एक विशेष पट्टी पर डाल कर और ग्लूकोमीटर में डाली जाती है, जो रीडिंग देती है। मधुमेह केटोएसिडोसिस वाले रोगी में आमतौर पर 250 मिलीग्राम / डेसीलीटर से ऊपर उच्च रक्त शर्करा का स्तर होता है, हालांकि कुछ मामलों में यह सामान्य हो सकता है।
  • रक्त कीटोन का स्तर: जब शरीर ऊर्जा के लिए फैट और प्रोटीन का विभाजन करने लगता है, तो रक्तप्रवाह में कीटोन्स नामक एसिड बढ़ना शुरू हो जाता है। रक्त में 5 mEq/L से अधिक कीटोन का होना, उसके उच्च स्तर को दर्शाता
  • रक्त यूरिया नाइट्रोजन: रक्त यूरिया नाइट्रोजन (बीयूएन) के स्तर को गुर्दे के कार्य की जांच के लिए मापा जाता है
  • रक्त इलेक्ट्रोलाइट स्तर: इलेक्ट्रोलाइट्स जैसे कि पोटेशियम, कैल्शियम, सोडियम, फॉस्फेट और मैग्नीशियम के सीरम के स्तर भिन्न-भिन्न हो सकते है, इसलिए उपचार के दौरान इसकी निगरानी की जानी चाहिए। इंसुलिन के साथ उपचार होने से भी उतार-चढ़ाव होता है, इसलिए इसे बार बार दोहराया जाना चाहिए।
  • रक्त अम्लीयता (ब्लड एसिड): यदि खून में कीटोन्स की मात्रा बढ़ जाए तो रक्त अम्लीय (एसिडोसिस) हो जाता है। इससे पूरे शरीर का सामान्य कार्य प्रभावित हो सकता है।
  • 3. यूरिनालिसिस : यूरिनालिसिस आपके मूत्र की जांच है,जिसका उपयोग मूत्र पथ संक्रमण, गुर्दे की बीमारी और मधुमेह जैसे विकारों की एक विस्तृत श्रृंखला का पता लगाने और प्रबंधित करने के लिए किया जाता है। इस परीक्षण में मूत्र की एकाग्रता और सामग्री की जांच की जाती है। मसलन मूत्र पथ के संक्रमण से मूत्र साफ होने के बजाय बादल जैसा दिखाई दे सकता है। पेशाब में प्रोटीन का बढ़ना किडनी की बीमारी का संकेत हो सकता है।
  • 4. चेस्ट एक्स-रे और इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम: उकसाने वाले कारकों (ट्रिगरिंग फैक्टर ) का पता लगाना जरूरी हैं, इसलिए दिल की स्थिति जानने के लिए चेस्ट या छाती का एक्स-रे और हृदय की गतिविधि जानने के लिए विद्युत इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम द्वारा परीक्षण किया जाना चाहिए।

    आप डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (DKA) का इलाज कैसे करते हैं?

    डीकेए एक मेडिकल इमरजेंसी या आपातकालीन स्थिति है जिसमें अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता होती है। उपचार में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • इंसुलिन थेरेपी:
    • डायबिटिक कीटोएसिडोसिस के इलाज का सबसे पहला लक्ष्य रोगी के ब्लड शुगर को नियंत्रित करना है। शुरुआत में ब्लड शुगर कम करने की दवाईयाँ दी जाती है। यदि शुगर लेवल बहुत अधिक है, तो रोगी को इंसुलिन के इंजेक्शन देने की आवश्यकता होती है। इसलिये निर्जलीकरण, पीएच और इलेक्ट्रोलाइट स्तर को सामान्य करने के लिए नस या इंट्रावेनस से तरल पदार्थ प्रशासित किया जाता है। आमतौर पर शुरू में सामान्य सेलाइन का उपयोग किया जाता है। यदि ग्लूकोज नियंत्रण में ना आ रहा हो तो, रक्त ग्लूकोज नियंत्रण के आधार पर रोगी को इंसुलिन थेरेपी दी जाती है।
    • जब ब्लड शुगर का स्तर लगभग 200 मिलीग्राम/ डीएल तक आ जाए और रक्त की अम्लीयता खत्म हो जाए तो इंसुलिन थेरेपी को रोक दिया जाता है। इसके बाद सामान्य रूप से चमड़ी के नीचे इंसुलिन के इंजेक्शन दिए जाते है।
  • इलेक्ट्रोलाइट रिप्लेसमेंट:
    • इलेक्ट्रोलाइट खून में मौजूद मिनरल्स होते है, जो सोडियम, पोटैशियम और क्लोराइड जैसे इलेक्ट्रिक चार्ज को पूरे शरीर में पहुँचाते है। इंसुलिन की कमी के कारण खून में कई तरह के इलेक्ट्रोलाइट की कमी हो जाती है।
    • इलेक्ट्रोलाइट्स को बदलने के लिए पोटेशियम और मैग्नीशियम को इन तरल पदार्थ में भी मिलाया जाता है और नस के जरिए ये इलेक्ट्रोलाइट रोगी को दिए जाते है, ताकि दिल, मांसपेशियाँ और तंत्रिका कोशिकाएँ सामान्य रूप से काम कर सकें।
    • मधुमेह केटोएसिडोसिस के अंतर्निहित कारण और सेरेब्रल एडिमा जैसी जटिलताओं का भी समाधान किया जाता है।

    मधुमेह केटोएसिडोसिस (DKA) को कैसे रोकते हैं?

    मधुमेहीयों और उनके परिवारों को इंसुलिन इंजेक्शन के नियमित रूप से और निर्धारित खुराक में लेने के महत्व के बारे में शिक्षित किया जाना चाहिए। उन्हें मधुमेह केटोएसिडोसिस के लक्षणों और संकेतों को जल्द से जल्द पहचानना सिखाया जाना चाहिए। जिससे कि उपचार प्रारंभिक अवस्था में ही शीध्र शुरू किया जा सके।

    निम्नलिखित सावधानियां मधुमेह कीटोएसिडोसिस को रोकने में मदद कर सकती हैं:

    • स्वयं की देखभाल कर के:
      • ब्लड शुगर के स्तर की सावधानीपूर्वक निगरानी करें।

      • एंटी डायबिटिक दवाएँ लेने के बाद यदि आपको हाइपोग्लाइसीमिया का अनुभव होता है, तो ऐसी स्थिति में अपने साथ मिश्री या चॉकलेट रखें। यह आपातकालीन स्थिति में सहायक होता है।
      • स्वस्थ महसूस ना होने पर 4-6 घंटे में कीटोन की जाँच करें।
      • यदि यूरिन टेस्ट में कीटोन्स की उपस्थिति का पता चलता है तो व्यायाम करने से बचें।
      • किसी भी स्थिति जो इन स्थितियों को तेज या उग्र करती हैं, जैसे दांत-दर्द और भावनात्मक तनाव उनको तुरंत संबोधित किया जाना चाहिए।
      • यदि आप असहज महसूस करते है तो अपने चिकित्सक से संपर्क करें।
      • डॉक्टरी सलाह के आधार पर ही दवाओं का सेवन करें।
    • जीवनशैली में परिवर्तन कर के:
      • आहार में चीनी युक्त खाद्य पदार्थों को प्रतिबंधित करें।
      • कम फैट या वसा और अधिक फाइबर वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
      • खून से कीटोन्स खत्म होने और ब्लड शुगर नियंत्रित होने के बाद नियमित रूप से व्यायाम करें।
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