Diabulimia

डायबुलिमिया क्या है?

डायबुलिमिया एक ऐसा शब्द है, जो दो शब्दों के अर्थ को जोड़ता है - डायबिटीज और बुलिमिया। मधुमेह, इंसुलिन कीअपर्याप्त मात्रा के कारण होने वाले अनुपयुक्त भंडारण और ग्लूकोज के उपयोग के कारण होने वाली विशेष स्थिति है और बुलिमिया एक खाने का विकार है जहां रोगी अत्यधिक खाता है और फिर भोजन को बाहर निकालने के लिए उल्टी को प्रेरित करता है।

डायबुलिमिया को ED-DMT1 (ईटिंग डिसऑर्डर-डायबिटीज मेलिटस टाइप 1) के रूप में भी जाना जाता है, यह खाने के सबसे खतरनाक विकारों में से एक है, जो हेरफेर से वजन कम कर के इंसुलिन को रोकने या कम करने के लिये एक अस्वास्थ्यकर अभ्यास को संदर्भित करता है।

डायबुलिमिया को अभी भी एक चिकित्सीय स्थिति के रूप में मान्यता नहीं मिली है, लेकिन यह मधुमेह रोगियों के बीच बहुत प्रसिद्ध है। जिन व्यक्तियों को किशोरावस्था के दौरान मधुमेह का निदान किया जाता है, वे इसके द्वारा, आहार प्रबंधन और इंसुलिन उपचार को, शरीर की बनावट और सामाजिक स्वीकृति के मुद्दों के कारण रोकते हैं।

डायबुलिमिया के कारण क्या हैं?

डायबुलिमिया तब होता है, जब मधुमेही इंसुलिन का सेवन कम कर देता है या पूरी तरह से बंद कर देता है, जिसकी उन्हें आवश्यकता होती है। वजन घटाने का यह तरीका स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है, क्योंकि इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है, जिससे किडनी पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है और पेशाब के जरिए शरीर से अतिरिक्त ग्लूकोज को निकालने के प्रयास में उन्हें अधिक मेहनत करनी पड़ती है।

डायबुलिमिया से पीड़ित व्यक्ति निम्नलिखित तरीकों से वजन नियंत्रण के लिए जानबूझकर इंसुलिन का दुरुपयोग करते हैं:

  • इंसुलिन की निर्धारित खुराक में कमी
  • इंसुलिन का सेवन बंद कर के
  • उचित खुराक में देरी
  • इंसुलिन में हेरफेर कर के।

डायबुलिमिया के लक्षण और संकेत क्या हैं?

डायबुलिमिया के रोगी अपने रक्त शर्करा के स्तर, इंसुलिन शॉट्स, खाने की आदतों के बारे में गोपनीयता बनाए रखते हैं और उनके रक्त शर्करा रिकॉर्ड हीमोग्लोबिन A1C परिणामों से मेल नहीं खाते। वे आम तौर पर अपने शरीर की छवि बनाने में व्यस्त रहते हैं और डॉक्टरों की नियुक्तियों को रद्द करने की प्रवृत्ति रखते हैं।

डायबुलिमिया के लक्षणों को लघु अवधि (शॉर्ट टर्म), मध्यम अवधि (मीडियम टर्म )और दीर्घ अवधि (लॉन्ग टर्म) लक्षणों में बांटा जा सकता है।

लघु अवधि: डायबुलिमिया के रोगियों के अल्पकालिक लक्षण निम्न हैं:

  • रक्त में ग्लूकोज़ का उच्च स्तर (लगातार 600 mg/dL या इससे अधिक),
  • कमजोरी,
  • थकान,
  • मूत्र में ग्लूकोज की बड़ी मात्रा,
  • लगातार पेशाब का होना,
  • लगातार प्यास लगना,
  • अत्यधिक भूख लगना,
  • एकाग्र करने में असमर्थता,
  • इलेक्ट्रोलाइट में गड़बड़ी,
  • गंभीर कीटोनुरिया और कीटोनीमिया,
  • सोडियम/पोटेशियम का निम्न स्तर।

मध्यम अवधि : ये लक्षण तब दिखाई देते हैं जब डायबुलिमिया का इलाज नहीं किया जाता है और इसमें कुछ अन्य लक्षण भी शामिल हो जाते हैं:

  • मध्यम से अत्यधिक निर्जलीकरण,
  • अपच,
  • मांसपेशियों का क्षय,
  • जीईआरडी- गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स रोग,
  • उच्च कोलेस्ट्रॉल,
  • गंभीर वजन कम होना,
  • द्रव प्रतिस्थापन के साथ एडिमा,
  • प्रोटीनुरिया।

दीर्घकालिक अवधि: यदि प्रकार1 मधुमेही डायबुलिमिया के वैकल्पिक चरण से गुजरता है तो निम्नलिखित दीर्घकालिक लक्षणों की अपेक्षा की जाती हैं:

  • उच्च कोलेस्ट्रॉल,
  • अत्यधिक थकान,
  • ऑस्टियोपोरोसिस,
  • रेटिनोपैथी,
  • बार-बार मूत्राशय और खमीर संक्रमण,
  • एडिमा,
  • न्यूरोपैथी,
  • नेफ्रोपैथी अंततः गुर्दे की विफलता का कारण बनती है,
  • हृदय की समस्याएं,
  • मृत्यु।

डायबुलिमिया के जोखिम कारक क्या हैं?

डायबुलिमिया जैविक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक-सांस्कृतिक कारको के संयोजन के कारण होता है।

निम्नलिखित डायबुलिमिया के जोखिम कारक हैं:

टाइप 1 मधुमेह: लगभग 25% महिलाओं में टाइप 1 का निदान किया जाता है जो कि खाने के विकार को विकसित करता है।

पारिवारिक इतिहास: हाल के अध्ययनों से पता चला है कि यदि किसी के रिश्तेदार (प्रथम श्रेणी के रिश्तेदार) को खाने के विकार या अन्य मानसिक बीमारी जैसे चिंता, अवसाद, या व्यसन हो तो टाइप 1 मधुमेहियों के लिए यह जोखिम को बढ़ाता है।

लिंग: किसी भी लिंग का व्यक्ति डायबुलिमिया विकसित कर सकता है लेकिन महिलाओं में इस स्थिति के विकसित होने की दर अधिक होती है।

व्यायामी या एथलीट: जो लोग नृत्य, दौड़ और जिमनास्टिक जैसे खेलों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं, वे दुबले-पतले शरीर को पसंद करते हैं और इसलिए वे उपचार को छोड़ देते हैं और अंत में उन्हें डायबुलिमिया हो सकता है।

समलैंगिक: गैर-विषमलैंगिक या गैर-लिंग के रूप में पहचाने जाने वाले व्यक्तियों में भेदभाव और शरीर की छवि के संकट के कारण डायबुलिमिया होने का अधिक जोखिम होता है।

यो-यो डाइटिंग: इसे वेट साइकलिंग के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि इससे वजन घटने के बाद वजन बढ़ता है; नतीजतन, इस परहेज़ अभ्यास से कभी-कभी डायबुलिमिया जैसे खाने के विकार हो सकते हैं।

मानसिक बीमारी: चिंता, अवसाद, जुनून बाध्यकारी विकार, और अन्य मानसिक बीमारियां अक्सर डायबुलिमिया और एनोरेक्सिया से जुड़ी होती हैं।

आघात: कभी-कभी हिंसा, गाली-गलौज, चोट, किसी प्रियजन की हानि और अन्य कष्टदायक स्थितियों जैसी घटनाओं से मुकाबला करने की रणनीति के रूप में खाने के विकार का विकास हो सकता है।

आप डायबुलिमिया का निदान कैसे करते हैं?

यदि किसी मधुमेह व्यक्ति का इंसुलिन उपचार के बाद भी हाइपरग्लेसेमिया और HbA1c अधिक है, अधिक भोजन का सेवन करने के बाद भी वजन का घटना , बार-बार होने वाले मधुमेह केटोएसिडोसिस और मधुमेह के लक्षण जैसे अत्यधिक भूख, पेशाब और प्यास लगती हैं, तो इसे डायबुलिमिया के रूप में निदान किया जाता है।

डायबुलिमिया के अधिकांश रोगी कई वर्षों तक बिना निदान के रह जाते हैं क्योंकि वे केवल अपने एंडोक्रिनोलॉजिस्ट या मधुमेह शिक्षकों को मूर्ख बनाते हैं।

स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं को एचबीए1सी स्तर की जांच करनी चाहिए, जो औसत रक्त शर्करा के माप दिखाता हैं। मधुमेह रोगी जो इंसुलिन ले रहे हैं और इंसुलिन के उपयोग के बारे में जो वे क्या कह रहे है, वह एचबीए1सी स्तर से मेल नहीं खाता हैं, तो यह खाने के विकार का संकेत हो सकता है। कुछ मामलों में, यदि HbA1c अधिक है और रोगी कहता है कि वह इंसुलिन ले रहा है (भले ही वह नहीं ले रहा हो), डॉक्टर यह मान सकते हैं कि रोगी को अधिक इंसुलिन की आवश्यकता है लेकिन एक अनुभवी डॉक्टर इसे डायबुलिमिया के रूप में निदान करेगा।

आप डायबुलिमिया का इलाज कैसे करते हैं?

वैसे डायबुलिमिया का कोई विशिष्ट उपचार नहीं है, लेकिन इसके उपचार के लिए एक व्यापक उपचार टीम की आवश्यकता होती है। जिसमें एक मधुमेह शिक्षक, एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, आहार विशेषज्ञ, विकार विशेषज्ञ और मनोचिकित्सक शामिल हो। चूंकि डायबुलिमिया में मधुमेह और बुलिमिया दोनों शामिल हैं, इसलिए एक टीम का होना बेहतर है जो दोनों समस्याओं को समझ सके। सबसे अच्छा उपचार आवासीय है जिसमें मधुमेह और खाने के विकारों दोनों में माहिर विशेषज्ञों की सुविधा हो। डायबुलिमिया के इलाज के लिए जिन कुछ उपचारों का उपयोग किया जा सकता है वे हैं:

  • संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा - एक चिकित्सा जहां मनोवैज्ञानिक चिकित्सक, व्यक्ति की समस्याओं के बारे में बात कर के, उन्हें अलग सोच और व्यवहार अपना करके, उन के विकार दूर करने के लिए प्रेरित करता है।
  • द्वंद्ववादी आचार चिकित्सा (डायलेक्टिकल बिहेवियर थेरेपी)- यह कॉग्निटिव बिहेवियरल थैरेपी पर आधारित है लेकिन इसमें थेरेपिस्ट और प्रभावित व्यक्ति के बीच संबंधों पर काफी जोर दिया गया है, जिसका इस्तेमाल व्यक्ति को बदलने के लिए प्रेरित करने के लिए किया जाता है।
  • स्वास्थ्य आहार के बारे में शिक्षा
  • योग और ध्यान, रोगियों को मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक पहलुओं को एकीकृत करके, उन्हें भौतिक छवि को महत्व देने के बजाय अपने आत्मविश्वास, आत्म-सम्मान और भावनाओं से गहरा संबंध बनाने के लिये प्रेरित करते हैं।
    • आप डायबुलिमिया को कैसे रोक सकते हैं?

      • डायबुलिमिया अभी भी एक अपेक्षाकृत अज्ञात चिकित्सा स्थिति है, इसलिए इस विकार के बारे में जागरूकता बढ़ाना जरूरी है, जोकि इस की रोकथाम और बेहतर प्रबंधन के लिए आवश्यक है।
      • मधुमेह के सर्वोत्कृष्ट प्रबंधन पर लक्षित उपचार कार्यक्रमों का विकास करना चाहिये।
      • लोगों को बॉडी मास इंडेक्स को समझने के लिए शिक्षित किया जाना चाहिए, ताकि वे अपने स्वस्थ वजन को निर्धारित कर सके।
      • चूंकि डायबुलिमिया एक विकार है जो अक्सर किशोरों में देखा जाता है, सभी स्कूल स्वास्थ्य कर्मियों को डायबुलिमिया वाले छात्रों को समायोजित करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए और बीमारी को रोकने के लिए स्वस्थ आहार और व्यायाम के महत्व के बारे में उनके ज्ञान में सुधार करना चाहिए।
      • हमें उन्हें शिक्षित करने और इन मुद्दों को इस तरीके से संबोधित करने की आवश्यकता है, जिस से उन्हें शर्मन्दिगी महसूस ना हो ब्लकि इस बिमारी से निकलने की प्रेरणा मिले।
      • यदि आपको संदेह है कि कोई व्यक्ति डायबुलिमिया के लक्षणों से पीड़ित है, तो मधुमेह स्वास्थ्य देखभाल टीम से संपर्क करें, उन्हें बता कर उस व्यक्ति को तुरंत सहायता प्राप्त करवायें। शुरुआती निदान और हस्तक्षेप से बहुत फर्क पड़ सकता है।
      • डायबुलिमिया भय, चिंता, अवसाद और अन्य मानसिक बीमारी से भी जुड़ा है, इसलिये मधुमेहियों में मधुमेह की शुरुआत को रोकने के लिए योग और ध्यान एक अच्छा विकल्प हो सकता है। ।
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