टाइप 3c (अग्नाशयी) मधुमेह क्या है?

अग्नाशयी या टाइप 3c मधुमेह मेलिटस, मधुमेह का एक रूप है जो दूसरे क्रम का हैं, जिसमें प्राथमिक रोग अग्न्याशय के बहिःस्रावी भाग में होता है और जो इंगित करता है कि भविष्य में यह मधुमेह में विकसित होगा।

यह माना जाता है कि 5-10% सभी मधुमेह रोगियों में अग्नाशयी मधुमेह हो सकता है

दिलचस्प बात यह है कि लगभग अग्नाशयी मधुमेह या पैंक्रिएटोजेनिक डायबिटीज का 80 प्रतिशत क्रॉनिक पैन्क्रियाटाइटिस के कारण होता है। सटीक आंकड़े ज्ञात नहीं हैं क्योंकि डेटा दुर्लभ रहता है और अक्सर अग्नाशयी मधुमेह के रोगियों को गलत वर्गीकृत किया जाता है।

केवल हाल ही में अग्नाशयी मधुमेह के लिए नैदानिक मानदंड प्रस्तावित किए गए हैं, जिससे सटीक निदान और स्थिति का उचित प्रबंधन संभव हो सके।

अग्न्याशय - संरचना और कार्य का अवलोकन

अग्न्याशय उदर गुहा में पाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण अंग है। यह लम्बा और पतला होता है और पेट के पीछे स्थित होता है। अग्न्याशय संरचनात्मक रूप से चार भागों में विभाजित है, अर्थात् सिर, गर्दन का शरीर और पूंछ या नीचे का भाग

कार्यात्मक रूप से, इसे दो भागों में विभाजित किया जाता है, बहिःस्रावी (एक्सोक्राइन) भाग और अंतःस्रावी भाग।

  • बहिःस्रावी (एक्सोक्राइन) भाग मुख्य रूप से सिर, गर्दन और शरीर में होता है और इसमें ग्रंथियां होती हैं जो पाचक रसों का स्राव करती हैं जो नलिकाओं के माध्यम से छोटी आंत में जाती हैं। छोटी आंत में एक्सोक्राइन अग्न्याशय के स्राव कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा को छोटे अणुओं में तोड़ने के लिए आवश्यक हैं जो बाद में रक्तप्रवाह में अवशोषित हो जाते हैं।
  • अग्न्याशय का अंतःस्रावी भाग, जिसे लैंगरहैंस के आइलेट्स के रूप में भी जाना जाता है, पूरे अग्नाशयी ऊतक में वितरित किया जाता है। कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि अग्न्याशय के पूंछ वाले हिस्से में आइलेट कोशिकाओं का उच्चतम घनत्व पाया जाता है। कुल मिलाकर, आइलेट कोशिकाओं में वयस्क अग्नाशयी ऊतक केवल 1-2% होते हैं।

अग्न्याशय का अंतःस्रावी भाग (आइलेट्स) दो महत्वपूर्ण हार्मोन को सीधे रक्तप्रवाह में स्रावित करता है, वे हैं इंसुलिन और ग्लूकागन। ये दोनों हार्मोन कार्बोहाइड्रेट चयापचय और रक्त शर्करा के स्तर के नियमन में महत्वपूर्ण हैं। इस प्रकार हम देखते हैं कि अग्न्याशय एक महत्वपूर्ण अंग है और अग्न्याशय के रोग किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं।

अग्न्याशय के सामान्य रोग

  • बहिःस्रावी अग्न्याशय को प्रभावित करने वाले रोगों के विभिन्न कारणों में, तीव्र और गंभीर अग्नाशयशोथ, कैंसर, आघात, सिस्टिक फाइब्रोसिस और हेमोक्रोमैटोसिस शामिल हैं।
  • अंतःस्रावी अग्न्याशय की सबसे आम बीमारी मधुमेह मेलेटस है जिसमें इंसुलिन हार्मोन की पूर्ण या सापेक्ष कमी होती है। इंसुलिन की कमी के कारण, ग्लूकोज का ठीक से चयापचय नहीं होता है जिसके परिणामस्वरूप रक्त शर्करा का स्तर बढ़ जाता है (हाइपरग्लेसेमिया)।

मधुमेह के प्रकार

मधुमेह के दो मुख्य प्रकार अंतःस्रावी अग्न्याशय के विकार ग्रस्त होने पर होते हैं।

टाइप 1 मधुमेह तब होता है जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा आइलेट्स में इंसुलिन स्रावित करने वाली कोशिकाएं (बीटा कोशिकाएं) पर हमला किया जाता हैं और वे नष्ट हो जाती हैं। इसके परिणामस्वरूप पूर्ण तरह से इंसुलिन की कमी हो जाती है।

टाइप 2 मधुमेह में, शरीर इंसुलिन हार्मोन के प्रभावों के प्रति उदासीन और प्रतिरोधी हो जाता है। नतीजतन, रक्त शर्करा के स्तर को कम करने के लिए अग्न्याशय द्वारा अधिक इंसुलिन जारी करने की आवश्यकता होती है। समय के साथ बीटा कोशिकाओं की इंसुलिन बनाने की क्षमता कम हो जाती है।

एक दुर्लभ प्रकार का मधुमेह जिसे अग्नाशयी मधुमेह कहा जाता है, यह तब होता है जब विकार मुख्य रूप से एक्सोक्राइन अग्न्याशय में होता है जो मधुमेह के विकास से पहले का चरण होता है। इसे टाइप 3cडायबिटीज भी कहा जाता है। यह माध्यमिक मधुमेह का रूप है क्योंकि प्राथमिक विकृति अंतःस्रावी अग्न्याशय में नहीं होती है।

टाइप 3c (पैनक्रिएटोजेनिक) डायबिटीज के कारण क्या हैं?

एक्सोक्राइन पैनक्रियास के कई विकार, पैन्क्रिएटोजेनिक (टाइप 3सी) डायबिटीज का कारण बन सकते हैं। इनमें निम्न शामिल हैं:

  • क्रॉनिक पैन्क्रियाटाइटिस - सबसे महत्वपूर्ण कारण हैं, यह लगभग 80% मामले के लिए जिम्मेदार है। क्रॉनिक पैन्क्रियाटाइटिस में टाइप 3सी मधुमेह विकसित होने की जोखिम, अवधि और अग्नाशयशोथ की गंभीरता के साथ बढ़ जाती है। अग्नाशय का शल्य चिकित्सा से विभाजन (सर्जिकल रिसेक्शन), विशेष रूप से डिस्टल(पूँछ) अग्न्याशय का, टाइप 3सी मधुमेह के विकास में तेजी लाता है।
  • तीव्र अग्नाशयशोथ - मुख्य रूप से शराब के दुरुपयोग और पित्त पथरी के कारण एक्सोक्राइन अग्न्याशय की अचानक सूजन आने से।
  • पुनरावर्ती अग्नाशयशोथ - अग्नाशयशोथ के बार-बार धटना क्रम का दोबारा होना।
  • सिस्टिक फाइब्रोसिस - एक विरासत में मिला विकार जो श्लेष्म प्लग द्वारा अग्नाशयी नलिकाओं के रुकावट के कारण एक्सोक्राइन अग्नाशयी ग्रंथियों की सूजन और प्रगतिशील घाव का कारण बनता है।
  • हेमोक्रोमैटोसिस - एक और विरासती विकार, जिसकी खास विशेषता हैं शरीर और अग्न्याशय में लौह का अधिभार, जो अग्न्याशय की बहिःस्रावी ग्रंथियों को नष्ट कर देता है।
  • अग्नाशय का कैंसर
  • अग्नाशयी अजनन या विकृति (एजेनिसिस) - गर्भाशय में अग्न्याशय का दोषपूर्ण विकास या अनुपस्थित होना।

    • एक्सोक्राइन (बहिःस्त्रावी) अग्नाशयी अपर्याप्तता की उपस्थिति (मोनोक्लोनल फीकल इलास्टेस़-1 या प्रत्यक्ष प्रकार्य संघटन परीक्षण)
    • अग्नाशय की इमेजिंग जैसे एमआरआई, सीटी या एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड जो अग्नाशयी रोग का सटीक खुलासा करती है।

      • 1.एक्सोक्राइन(बहिःस्त्रावी) अग्नाशयी अपर्याप्तता की उपस्थिति (मोनोक्लोनल फीकल इलास्टेस़-1 या प्रत्यक्ष प्रकार्य संघटन परीक्षण)
      • 2.अग्नाशयी की इमेजिंग जैसे एमआरआई, सीटी या एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड जो अग्नाशयी रोग का सटीक खुलासा करती है।
      • 3. टाइप 1 मधुमेह से संबंधित स्वप्रतिरक्षी चिह्नक (मार्करों) की अनुपस्थिति (स्वप्रतिपिंड)।

      प्रमुख मानदंडों के अतिरिक्त अप्रमुख मानदंडों की उपस्थिति भी सही निदान करने में सहायक हो सकती हैं जैसे कि-

      • बिगड़ा बीटा सेल फ़ंक्शन मौखिक ग्लूकोज सहिष्णुता परीक्षण (ओजीटीटी) द्वारा मापा गया हो। मधुमेह का निदान दो घंटे के रक्त शर्करा के स्तर ≥200 मिलीग्राम/डेसीलीटर द्वारा किया जाता है और बिगड़ी हुई ग्लूकोज सहिष्णुता तब होती है जब दो घंटे का ग्लूकोज का माप 140-199 मिलीग्राम/डेसीलीटर आता है, जो पूर्व-मधुमेह के अनुरूप भी होता है।
      • इंसुलिन प्रतिरोध की उपस्थिति का कोई सबूत नहीं होता है उदाहरण के लिए इंसुलिन प्रतिरोध के होमोस्टैटिक मॉडल आंकलन (HOMA-IR)।
      • लिपिड घुलनशील विटामिन ‘ए, डी, ई और के’ के सीरम स्तर में कमी (क्योंकि एक्सोक्राइन अग्नाशयी अपर्याप्ततासे वसा पाचन खराब हो जाता है)।
      • बिगड़ा हुआ इन्क्रीटिन स्राव (जो आम तौर पर इंसुलिन स्राव को उत्तेजित करता है, उदाहरण के लिए गैस्ट्रिक निरोधात्मक पॉलीपेप्टाइड या अग्नाशयी पॉलीपेप्टाइड स्राव, जो आमतौर पर आइलेट कोशिकाओं द्वारा स्रावित होता है)।

      टाइप 3सी (अग्नाशयी) मधुमेह का इलाज कैसे किया जाता है?

      टाइप 1 और टाइप 2 के साथ टाइप 3सी मधुमेह के प्रबंधन का प्राथमिक लक्ष्य रहता है हृदय, गुर्दे, आंख और तंत्रिका संबंधी जटिलताओं के जोखिम को कम करना, HbA1c <7% को प्राप्त करना और बनाए रखना, हाइपरग्लेसेमिया पर नियंत्रण रखना।

      प्रबंधन के विभिन्न रूपों में निम्न शामिल हैं:

      • अग्नाशयी मधुमेह के जोखिम को कम करने और संबंधित जटिलताओं को रोकने के लिए जीवनशैली में संशोधन
      • पोषण संबंधी सहायता
      • सर्जरी
      • दवाईयाँ
    • जीवनशैली में बदलाव:

      धूम्रपान और शराब छोड़ दें क्योंकि ये अग्न्याशय और फाइब्रोसिस की सूजन को बढ़ाने में योगदान करते हैं। स्वस्थ वजन बनाए रखें क्योंकि मोटापा इंसुलिन संवेदनशीलता को कम करता है।

    • पौष्टिक सहायता-

      गंभीर अग्नाशयशोथ संबंधी मधुमेह की पोषण चिकित्सा के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

      • रोगियों को घुलनशील फाइबर से भरपूर और कम वसा वाला भोजन करने की सलाह दे कर के कुपोषण को रोक कर उपचार करना।
      • अग्नाशयी एंजाइम की खुराक के साथ स्टीटोरिया के लक्षणों पर नियंत्रण करना।
      • नियंत्रित भोजन से हाइपरग्लेसेमिया को कम करना।
      • एक्सोक्राइन अग्नाशयी अपर्याप्तता के लिए मौखिक एंजाइम प्रतिस्थापन चिकित्सा करना। एंजाइम प्रतिस्थापन विशेष रूप से वसा पाचन और पोषक तत्वों के अवशोषण में सहायता करने के लिए महत्वपूर्ण है और यह वसा में घुलनशील विटामिन की कमी को भी रोकता है। यह इन्क्रीटिन हार्मोन के स्राव को भी बनाए रखता है, जिससे ग्लूकोज सहनशीलता में सुधार होता है।
      • गंभीर अग्नाशयशोथ में अक्सर मौजूद विटामिन डी की कमी को पूरक आहार के साथ इलाज करना।

      सिस्टिक फाइब्रोसिस से संबंधित अग्नाशयी मधुमेह (CFRD) में, चिकित्सा के लक्ष्यों में शामिल हैं:

      • इष्टतम पोषण स्थिति और सामान्य रक्त शर्करा का स्तर प्राप्त करना।
      • बिना किसी कैलोरी, कार्बोहाइड्रेट या वसा फैट के सेवन के प्रतिबंध से, केवल एक अच्छी तरह से संतुलित आहार का सेवन करके रक्त शर्करा को नियंत्रित करना।
      • वसा में घुलनशील विटामिन के पूरक का उपयोग करना।

      अन्य प्रकार के मधुमेह के विपरीत, सीएफआरडी में नमक और प्रोटीन प्रतिबंध की अनुशंसा नहीं की जाती है, यहां तक कि धमनी उच्च रक्तचाप या माइक्रोवेसल जटिलताओं की पृष्ठभूमि में भी।

    • शल्य चिकित्सा (सर्जरी):

      आइलेट ऑटोट्रांसप्लांटेशन के साथ कुल पैन्क्रिएटेक्टोमी चुनिंदा रोगियों की गंभीर जटिलताओं का इलाज करने के लिए की जाने वाली नियोजित शल्य चिकित्सा पद्धति है जिस में रोगियों को बार-बार अस्पताल में भर्ती होने के साथ बार-बार तीव्र और पुराने अग्नाशयशोथ का दर्द होता हैं। गंभीर मधुमेह मेलेटस के जोखिम को कम करना और अग्नाशय के कैंसर के उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों के लिये यह सर्जरी लाभदायक हैं।

    • एंटीहाइपर ग्लाइसेमिक घटक या एजेंट:

      गंभीर अग्नाशयशोथ जो हल्के मधुमेह से जुड़े होते है, एक मौखिक एंटीहाइपरग्लाइसेमिक एजेंट, जैसे मेटफॉर्मिन, जो इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार करते हैं उनके सेवन पर विचार किया जा सकता है, लेकिन यह मौखिक एजेंट एंटी-हाइपरग्लाइसेमिक CFRD में उपयोगी नहीं हैं, क्योंकि वे रोगी के चयापचय या पोषण की स्थिति में सुधार करने में इंसुलिन की तुलना में कम प्रभावी होते हैं।

      अधिकांशतः में इंसुलिन की उपचार को प्राथमिकता दी जाती है। गंभीर रूप से बीमार, कुपोषित, या अस्पताल में भर्ती रोगियों के लिए, विशेष रूप से सीएफआरडी में हाइपरग्लेसेमिया को ठीक करने के लिए, जिसमें इंसुलिन के चयापचय प्रभाव रोगी के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होते हैं।


      नई दवाओं का आशाजनक परिणाम

      इन उभरती दवाओं में से एक है जिसने टाइप 3सी मधुमेह के इलाज में बहुत अच्छा परिणाम दिखाया है, दूसरे क्रम के गंभीर अग्नाशयशोथ अग्नाशयी पॉलीपेप्टाइड (पीपी) के लिए भी। यह लीवर में इंसुलिन रिसेप्टर्स की अभिव्यक्ति को बढ़ाता है, जिससे इंसुलिन का परिसंचार बेहतर और अधिक प्रभावी होता है। यह इंसुलिन संवेदनशीलता को भी बढ़ाता है और टाइप 3सी मधुमेह के रोगियों में इंसुलिन की आवश्यकता को कम करता है।

    • आप टाइप 3c (अग्नाशयी) मधुमेह को कैसे रोकते हैं?

      गंभीर पुराने अग्नाशयशोथ के कारण होने वाले अग्नाशयी प्रकार 3c मधुमेह के विकास के जोखिम कारकों को कम करके रोका जा सकता है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

      • शराब का सेवन कम करें,
      • धूम्रपान से बचें,
      • वसायुक्त और तले हुए खाद्य पदार्थों से परहेज करके और स्वस्थ वजन बनाए रखकर पित्त पथरी के विकास की संभावना को कम करें,
      • ताजे फल और सब्जियों से भरपूर स्वस्थ आहार खाएं,
      • नियमित रूप से व्यायाम करें और मोटापे से बचें।
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