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गर्दन के दर्द का घरेलू उपचार


गर्दन दर्द क्या हैं?

गर्दन का दर्द, गर्दन की मांसपेशियों, हड्डियों, हड्डियों के बीच की डिस्क, या नसों के ऐंठन का परिणाम हैं। गर्दन की मांसपेशियाँ गलत अंग-विन्यास में बैठने या कंप्यूटर पर लगातार काम करने या कार्यक्षेत्र में लगातार देर तक काम करने से, गर्दन में ऐंठन आने के कारण होती हैं। कुछ रोग व्यक्ति के, गर्दन के दर्द को और उत्तेजित करते हैं। कुछ शारीरिक गतिविधियां या दुर्घटनाएं भी गर्दन में दर्द उत्पन्न कर सकती हैं। गर्दन का दर्द, सामान्य रूप में, किसी गंभीर अवस्था को नहीं दर्शाता हैं। हालांकि, यदि किसी व्यक्ति की बाहों में सुन्नता या हाथों में तीव्र दर्द उठता हैं तब उसे डाक्टर से परामर्श करना चाहिये।
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गर्दन में दर्द के कारण

गर्दन में दर्द के कई कारण होते हैं। उनमें से कुछ इस प्रकार हैं:

मांसपेशियों में तनावः लंबे समय तक कंप्यूटर पर काम करने से गर्दन में दर्द होना सबसे आम कारण हैं। अधिकांशत: पढ़ते समय, टेलीविजन देखने के समय गलत अवस्था में बैठने से, गर्दन में अकड़न और दर्द होता हैं। कभी-कभी व्यायाम करते समय, गलत स्थिति में सोने से या अचानक गलत ढंग से मुड़ने से भी गर्दन की मांसपेशियों में ऐंठन आ जाती हैं और व्यक्ति दर्द से पीड़ित हो जाता हैं।


गठियाः स्पोंडिलोसिस या सर्वाइकल आर्थिराइटिस के कारण गर्दन में अकड़न और दर्द होता हैं। स्पोंडिलोसिस मेरुदंड की हड्डियों की असामान्य बढ़ोत्तरी और वर्टेब के बीच के कुशन के अपने स्थान से सरकने और घिस जाने की वजह से होता हैं। आम तौर से यह खिलाड़ियों में देखा जा सकता हैं।

स्पाइनल स्टेनोसिस/मेरूदंड संकुचनः जब मेरूदंड की नालिका संकरी हो जाती हैं, तब गर्दन में दर्द होता हैं। इसी प्रकार, रीढ़ की हड्डी में संक्रमण जैसे अंतर मेरूदंडीय डिस्क, अस्थिमज्जा के प्रदाह के कारण भी गर्दन में दर्द होता हैं।

फाइब्रोम्याल्जिया: फाइब्रोम्याल्जिया के रोगी मांसपेशियों, जोड़ों और पट्ठों के दर्द से ग्रस्त होते हैं। गर्दन का दर्द फाइब्रोम्याल्जिया के लक्षणों में से एक हैं।


मोच और हड्डी टूटना: अचानक झटके से गर्दन घुमाने पर मोच आने से गर्दन का दर्द हो सकता हैं। गर्दन का दर्द चोटों और दुर्घटनाओं के कारण, जैसे रक्त वाहिकाओं की चोट, लकवा, गर्दन की मोच, और रीढ़ के जोड़ के टूटने से भी हो सकता हैं। अस्थि भंग/ऑस्टियोपोरोसिस भी गर्दन की हड्डी टूटने का एक कारण हैं। जब गर्दन में रीढ़ की हड्डी के जोड़ के बीच डिस्क टूटती हैं, तब व्यक्ति को मेरूदंड की नसों पर बहुत अधिक दबाव पड़ने के कारण गर्दन दर्द महसूस होता हैं।

कैंसरः जब रीढ़ की हड्डी कैंसर के साथ प्रभावित होती हैं, तब भी व्यक्ति को गर्दन में दर्द होता हैं। अन्य स्थितियां जो गर्दन के दर्द को प्रवृत करती हैं, वह हैं गर्दन तोड़ बुखार या दिमागी बुखार और संधिवात गठिया हैं।

गर्दन के दर्द के लिए घरेलू उपचार

ठंडी या गर्म पट्टियां: हल्के गर्दन दर्द के, शुरू के 48 से 72 घंटों में, ठंडी पट्टियां लगा सकते हैं। ठंडी पट्टियों के बाद, गर्म पट्टी लगाये या गर्म पानी से स्नान भी कर सकते हैं।

दर्द नाशक दवाएं: गर्दन की सूजन कम करने के लिए आप एसिटामिनोफेन जैसी दवाएं इस्तेमाल कर सकते हैं। विशेष रूप से इबुप्रोफेन दर्द नाशक, का बहुत ज्यादा उपयोग नहीं करना चाहिये, क्यूंकि इससे पेट और ग्रहणी का अल्सर हो सकता हैं।

व्यायामः सिर को दोनो तरफ या ऊपर और नीचे की ओर मोड़ने या गर्दन को हलका घुमाने पर गर्दन की मांसपेशियों के व्यायाम से मदद मिलती हैं।


वज़नः एक मेड़िकल चिकित्सक या शारीरिक चिकित्सक गर्दन की मांसपेशियों के खिंचाव या उन्हें स्थिर करने के लिए वजन/भार का उपयोग करता हैं। ऐसा करने पर दर्द से तत्काल राहत मिलती हैं। इस विधि को कर्षण या ट्रैक्शन कहा जाता हैं।

पारंपरिक चीनी चिकित्साः रोगी अक्सर पारंपरिक चिकित्सा के विकल्प के रूप में, पूरक और वैकल्पिक चिकित्सा (सी. ए. एम.) का उपयोग करते हैं। रोगी जिन्सेंग या विटामिन ले सकते हैं, और यहां तक कि गर्दन में दर्द के लक्षणों को कम करने के लिए काइरोप्रैक्टिक चिकित्सक के पास उपचार करवा सकते हैं। वैकल्पिक चिकित्सा कम लागत और बहुत कम दुष्प्रभाव के कारण एक पसंदीदा विकल्प माना जाता हैं। काइरोप्रैक्टिक चिकित्सक प्रभावित जोड़ों को कई श्रृंखलित गतिविधियों से आंदोलित करते हैं। यह जानना बहुत महत्वपूर्ण हैं कि काइरोप्रैक्टिक से, गर्दन परिचालन से व्यक्ति को क्या लकवे (स्ट्रोक) की जोखिम (शायद रक्त वाहिकाओं के नुकसान के कारण) हो सकती हैं। जो अध्ययन इन्हें लकवे (स्ट्रोक) से जोड़ते हैं, वह अभी तक प्रमाणिक और निर्णयात्मक सिद्ध नहीं हुये हैं।

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एक्यूपंक्चर गर्दन के दर्द के उपचार की एक आम विधि हैं। यह विधि विशिष्ट दबाव बिंदुओं पर सुई चुभाकर शरीर की ऊर्जा के स्तर में सुधार करने पर आधारित हैं। हालांकि व्यक्तियों के दर्द से राहत पाने के अलग-अलग अनुभव हैं, अभी तक इसे वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं किया जा सका हैं। रोगियों के अनुभवों में अंतर पाया जाना एक प्रयोगिक औषधी (प्लेसिबो) का प्रभाव भी हो सकता हैं। एक अन्य वैकल्पिक पूरक चिकित्सा जिसे गुहा शा चिकित्सा कहते हैं, जिससे गर्दन के दर्द में काफी सुधार दिखता हैं। अतिरिक्त नैदानिक शोध के आंकड़े इसके परिणामों की पुष्टि करने के लिए आवश्यक हैं। गुहा शा चिकित्सा प्राप्त करने वाले रोगियों में एक सत्र के बाद से ही गर्दन दर्द में कमी देखी गई ।


मालिश चिकित्सा: एक हल्की मालिश गर्दन की मांसपेशियों को आराम देती हैं। वैज्ञानिक अनुसंधान परीक्षणों में भी यह पाया गया हैं कि मालिश चिकित्सा से गर्दन दर्द में तुरंत आराम पहुंचता हैं।

टांसक्यूटेनस विद्युत तंत्रिका उत्तेजनः इस विधि के अंर्तगत दर्द वाले स्थान के पास इलेक्ट्राड रख कर, लघु विद्युत तरंगों से दर्द वाले स्थान को उत्तेजित कर के दर्द कम किया जाता हैं।

चिकित्सक से परामर्शः यदि कोई व्यक्ति गर्दन के दर्द को दूर करने के लिए गर्दन कॉलर का उपयोग करना चाहता हैं, तब उसे चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। लंबे समय तक गर्दन का कॉलर इस्तेमाल करने से गर्दन की मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं। यदि किसी व्यक्ति को बुखार हो जाता हैं और गर्दन दर्द से कठोर हो गई हैं, तो चिकित्सक से परामर्श किया जाना चाहिए। अगर व्यक्ति बुखार के कारण गर्दन मोड़ने/झुकाने में असमर्थ हैं, तो चिकित्सक को गर्दन तोड़ बुखार या मस्तिष्क ज्वर की संभावना होने के लिए आंकलन करना चाहिये।


आराम करें: दर्द के बढ़ जाने पर, व्यक्ति को किसी भी प्रकार की शारीरिक गतिविधि या श्रम करने से विराम लेना चाहिए, जब तक की गर्दन दर्द में कमी नहीं हो जाती।

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कार्टिकोस्टेरायड इंजेक्शनः चिकित्सक दर्द कम करने के लिए मांसपेशियों या हड्डियों या तंत्रिका जड़ों में स्टेरॉयड इंजेक्शन लगा सकते हैं।

सर्जरीः गर्दन दर्द में शल्य चिकित्सा की आवश्यकता नहीं हैं जब तक कि मेरूदंड की नसों पर दबाव नहीं होता हैं।