फाइलेरिया का निदान और उपचार

फाइलेरिया का निदान रात में लिये रक्त या त्वचा के नमूने में माइक्रोएफिलरिया की उपस्थिति देखकर किया जाता हैं। फाइलेरिया के उपचार के लिये डायमिथाइल कार्बामाजीन (डीईसी) देने की सिफारिश की जाती हैं।

क्‍या आप अपने स्वास्थ को ले कर चिंतित हैं और इस विषय में डॉक्टर से परामर्श करना चाहते हैं ?

आप फाइलेरिया का निदान कैसे करते हैं?

फाइलेरिया का निदान करने के लिए आमतौर पर इस्तेमाल किये जाने वाली विधियों में निम्न शामिल हैं -
  • रक्त या त्वचा के नमूनों में माइक्रोफिल्लेरिया का स्पष्ट दिखाई पड़ना। आमतौर पर रक्त के नमूने रात में एकत्र किये जाते हैं क्योंकि माइक्रोफिलरिया रात के समय विचरण करते हैं।
  • सीरम निदान परीक्षणों द्वारा रोग प्रतिकारक की जांच की जाती हैं
  • फाइलेरियल एंटीजन (सीएफए) परिसंचरण जांच

आप फाइलेरिया का उपचार कैसे करते हैं?

डायथाइल्कार्बामाजीन (डीईसी) फाइलेरिया के उपचार की अनुशंसित दवा हैं। यह माईक्रोफिलेरिया को मारता हैं, पर व्यस्क कीड़े पर इसका कोई प्रभाव नहीं होता। इस प्रकार यह केवल एक व्यक्ति से दूसरे में संक्रमण फैलने से रोककर संक्रमण को नियंत्रित करने में मदद करता हैं। इससे कुछ व्यक्तियों में प्रतिक्रिया हो सकती हैं। कुछ रोगियों में इवरमैक्टिन या एल्बेन्डजोल भी उपयोगी हो सकते हैं।

रोगग्रस्त हिस्से की अच्छी साफ सफाई और स्वच्छता बनाए रखकर लिम्फेडीमा और त्वचा में द्वितीयक बैक्टीरिया संक्रमण के बिगड़ने से बचा जा सकता हैं। प्रभावित अंग को ऊंचा उठाकर रखा जाना चाहिए और लिम्फ प्रवाह को बेहतर बनाने के लिए नियमित व्यायाम किया जाना चाहिए।

जबकि फाइलेरिया के उपचार के लिए दवाएं उपलब्ध हैं, पैरों की सूजन एक व्यक्ति में साफ देखी जा सकती हैं और वह भद्दी भी लगती हैं। इसलिए फाइलेरिया में मच्छरों के काटने से बचना सबसे बेहतर उपाय हैं। एरोसोल का उपयोग, मच्छर नाशक क्रीम, मैट्स, कॉयलनेट और स्वच्छता के बेहतर अभ्यास के साथ मच्छरों के प्रजनन की रोकथाम करने से आप फिलेरिया फैलने में मदद कर सकते हैं।


पैरों की सूजन एक व्यक्ति में साफ देखी जा सकती हैं और वह भद्दी भी लगती हैं। फाइलेरिया के उपचार के लिए दवाएं उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए फाइलेरिया में मच्छरों के काटने से बचना ही सबसे बेहतर उपाय हैं। एरोसोल का उपयोग, मच्छर नाशक क्रीम, मैट्स, कॉयल, नेट और स्वच्छता के बेहतर अभ्यास के साथ मच्छरों के प्रजनन की रोकथाम करके ही हम फिलेरिया को फैलने से रोकने में मदद कर सकते हैं।