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मधुमेह और व्यायाम

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सुरक्षित व्यायाम के लिए नियम

  • जब रक्त में ग्लूकोज की मात्रा 250mg/dl से अधिक हो और मूत्र में केटोन हो तो व्यायाम करने से बचें
  • हाइपोग्लाइसीमिया के मामले में व्यायाम करने के दौरान भोजन या ग्लूकोज की गोलियां अपने पास अवश्‍य रखें
  • विशेष रूप से, व्यायाम करने से पहले भोजन करना न छोड़ें
  • जब किसी व्यीक्ति का रक्त ग्लूकोज 100 एमजी / डीएल से कम हो जाता हैं या यदि उसे हाइपोग्लाइसीमिया के लक्षण अनुभव होने लगे जैसे कि सिरदर्द,अत्यातधिक पसीना आना, भूख लगना, कंपन और सिहरन, दिल का तेजी से धडकना, मानसिक भ्रम और उनींदापन महसूस होने लगे तब एक त्वरित क्रियाशील-कार्बोहाइड्रेट (मीठी चाय या दूध, नियमित शीतल पेय) लें।
  • जब किसी व्‍यक्ति का रक्त ग्लूकोज 300 एमजी / डीएल से अधिक हो जाता हैं तब व्‍यायाम करने से बचें
  • बहुत ज्‍यादा गर्मी या नमी के दिन बाहर व्‍यायाम मत करें किसी व्‍यक्ति को गर्मी के कारण कमजोरी या लू लग सकती हैं। यदि इन स्थितियों में आवश्‍यकता हैं तब टोपी या सन्स्क्रीन पहनें।
  • गर्मी के मौसम में, हल्‍के रंग और ढीले कपड़े पहनें
  • निर्जलीकरण से बचने के लिये व्‍यायाम से पहले और बाद में एक कप ठंडा पानी पिएं
  • यदि 30 मिनट से भी अधिक समय से व्‍यायाम कर रहे हैं या यदि व्‍यायाम करते समय बहुत ज्‍यादा पसीना बह गया हैं तब व्‍यायाम के दौरान पानी अवश्‍य पिएं
  • हमेशा व्‍यायाम के दौरान,अपने साथ विधिवत भरा हुआ मधूमेह पहचान कार्ड अवश्‍य रखें,
  • निर्जलीकरण से बचने के लिये पर्याप्‍त मात्रा में तरल पदार्थ पिएं
  • इंसुलिन के उच्‍च असर के समय व्‍यायाम करने से बचें
  • जिन मांसपेशियों का उपयोग कर व्‍यायाम करना हैं उनपर इंसुलिन का इंजेक्‍शन लगाने से बचें
  • अपने स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल टीम के साथ किसी भी प्रकार की शारीरिक गतिविधि करने से पहले व्‍यायाम के सबसे अच्‍छे समय के बारे में जांच करें
  • चोट से बचने के लिये हमेशा सही प्रकार के जूतों का उपयोग करें और नियमित रूप से उनके कटने फटने की जांच करते रहें
  • व्‍यायाम के बाद पैरों पर छाले या फोड़ों की जांच करें
  • व्यायाम के दौरान हृदय की समस्याओं की चेतावनी के लक्षणों से अवगत रहें, जैसे छाती, बाएं हाथ या जबड़े में दर्द, चक्कर आना, बेहोशी और सांस की तकलीफ
  • नाडी की गति मापना सीखें, ताकि किसी प्रकार की अनियमित गति होने की स्थिति में स्वयं जांच की जा सके, विशेष रूप से जब हदय-रोग हैं।

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