गृह गर्भाधान जॉंच का सिद्धांत क्या है?

गृह गर्भाधान जॉंच मरीज़ के पेशाब में ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोफिन नामक हार्मोन की उपस्थिति की जॉंच करती है।

जब निषेचित भ्रूण गर्भ में प्रत्यारोपित हो जाता है तब गर्भनाल (प्लासेंटा) का विकास होना शुरु होता है और वह एच सी जी हार्मोन को रक्त मे स्रावित करना शुरु करता है । यह अंडोत्सर्ग के लगभग ६-१२ दिनों के बीच होता है।

गर्भावस्था के शुरू के कुछ सप्ताह तक ख़ून में एच सी जी हार्मोन की मात्रा तेज़ी से बढ़ती है, और लगभग हर २-३ दिनों में इसकी मात्रा दुगनी हो जाती है । गर्भावस्था के ८-११ वें सप्ताह में, एच सी जी हार्मोन की मात्रा अधिकतम रहती है और फिर उसकी मात्रा धीरे- धीरे घटने लगती है जो प्रसव के कुछ सप्ताह बाद तक घटती रहती है।

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