अव्यक्त स्व-प्रतिरक्षित मधुमेह या लेटेंट ऑटोइम्यून डायबिटीज़?

व्यसक उम्र का लेटेंट ऑटोइम्यून डायबिटीज़ (जिसे कभी-कभी टाइप 1.5 डायबिटीज़ कहा जाता है) ऑटोइम्यून टाइप 1 डायबिटीज़ का एक रूप है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अग्न्याशय के आइलेट्स में इंसुलिन पैदा करने वाली कोशिकाओं पर हमला करती है और उन्हें नष्ट कर देती है।

प्रो. डेविड लेस्ली, प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर ऑफ़ एक्शन लाडा द्वारा प्रदान की गई परिभाषा इस प्रकार है -

“लाडा को शुरुआत में गैर-इंसुलिन पर निर्भर मधुमेह के रूप में परिभाषित किया गया है जिसका निदान 30-50 आयु वर्ग के लोगों में किया जाता है लेकिन जीएडी- ग्लूटामिक एसिड डीकार्बोक्सिलेज के एंटीबॉडी के साथ।“
नोट -ग्लूटामेट डिकार्बोक्सिलेज या ग्लूटामिक एसिड डिकार्बोक्सिलेज (GAD) एक है, एंजाइम जो ग्लूटामेट के डीकार्बाक्सिलेशन को GABA और CO₂ में उत्प्रेरित करता है। गैड GAD पीएलपी को उप-कारक के रूप में उपयोग करता है। पीएलपी (पाइरिडोक्सल फॉस्फेट) कई एंजाइम के वाहक, कार्बन की प्रतिक्रिया को रोकना और उन्हें निकालने की प्रतिक्रियाओं में शामिल है; ग्लूटामेट को गामा-एमिनोब्यूट्रिक एसिड में बदलने के लिए यह आवश्यक है।

सामान्य रूप से ऑटोइम्यून टाइप 1 मधुमेह का निदान बचपन या युवा वयस्कों में किया जाता है बल्कि कभी जल्दी और कभी-कभी कुछ ही दिनों में। लेकिन लाड़ा अधिक धीरे-धीरे विकसित होता है, जिस से इसे अक्सर महीनों से वर्षों तक की अवधि लग जाती हैं। इसलिए रोगी में जब मधुमेह की सबसे पहले उपस्थिति ज्ञात होती हैं तब वे अपने तीसवें दशक में होते हैं। चिकित्सक उम्र के कारण अक्सर टाइप 1 डायबिटीज़ का गलत निदान करते हैं और इसे टाइप 2 व्यस्क मधुमेह की शुरुआत मान कर गलत पहचान कर लेते हैं।

कई वैज्ञानिकों का मानना है कि लाड़ा, टाइप 1 मधुमेह का एक उप-प्रकार है। दूसरों का मानना है कि मधुमेह निरंतर विकसित होता है, जिसमें लाड़ा (LADA) टाइप 1 और टाइप 2 मधुमेह के बीच आता है। इसी कारण लाड़ा को टाइप 1.5 मधुमेह के नाम से भी जाना जाता है।

लाड़ा का महामारी विज्ञान

टाइप 2 मधुमेह से पीड़ित सभी व्यक्तियों में से 6-50% के बीच को लाड़ा हो सकता है। यह आंकड़ा अमेरिका के कुल मधुमेह आबादी का अनुमानित ५-१०% या लाड़ा से ग्रसित ३.५ मिलियन व्यक्तियों का है। लाड़ा वाले व्यक्तियों का सामान्य बीएमआई होता है या निदान से पहले ही वजन कम होने की प्रक्रिया के कारण उनका वजन कम हो सकता है। हालांकि, लाड़ा वाले कुछ लोग हल्के मोटे से अधिक वजन वाले भी हो सकते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि लाड़ा वाले कुछ लोगों में वास्तव में टाइप 2 मधुमेह का पारिवारिक इतिहास होता है।

अव्यक्त ऑटोइम्यून मधुमेह के तथ्य और आंकड़े

  • अव्यक्त स्वप्रतिरक्षी मधुमेह वास्तव में गुप्त नहीं है है। यह केवल तुरंत स्पष्ट दिखाई नहीं देता है।
  • लाडा के निदान के लिए वहां स्वप्रतिरक्षा हेतुविज्ञान (ऑटोइम्यून ईटीओलॉजी) का प्रमाण होना चाहिए ।
  • लाडा के निदान वाले अधिकांश व्यक्ति 30 से अधिक आयु वाले हैं।
  • लाडा वाले कई व्यक्तियों में टाइप 2 मधुमेह होने का गलत निदान किया जाता है, क्योंकि अग्न्याशय अभी भी कुछ इंसुलिन पैदा कर रहा होता है। उनके सारे लक्षण समान होते हैं जैसे अत्यधिक प्यास, बार-बार पेशाब आना, उच्च रक्त शर्करा का स्तर और धुंधली दृष्टि।
  • लाडा को शुरू में आहार और जीवन शैली में संशोधन के साथ रूढ़िवादी रूप से प्रबंधित किया जा सकता है लेकिन अंततः इसमें टाइप 1 मधुमेह के समान इंसुलिन की आवश्यकता होगी।
  • लाडा का निदान करना मुश्किल हो सकता है क्योंकि इस स्थिति को जानने के लिए स्क्रीनिंग की निश्चित परिक्षण प्रणाली नहीं हैं। फिर भी कुछ चिंह (मार्कर) हैं और इनके लक्षणों पर विचार किया जाना चाहिए।
  • जब टाइप 2 मधुमेही, मौखिक मधुमेह विरोधी दवाईयों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाता हैं तो यह समझना चाहिये कि रोगी लाडा से ग्रसित हैं, टाइप 2 मधुमेह से नही। अतिरिक्त पुष्टि के लिए रक्त में एंटीबॉडी की उपस्थिति की हैं या नहीं, यह पता लगाये।
  • वर्तमान में कोई निश्चित उपचार दिशानिर्देश नहीं हैं, हालांकि शोध से पता चलता है कि निदान के तुरंत बाद इंसुलिन की छोटी खुराक मदद कर सकती है।

लाडा की खोज कैसे हुई -

इतिहास गवाह हैं कि कई वैज्ञानिक खोजें अनजाने में, गलती से हो गई थी, ठीक उसी तरह, लाड़ा को ले कर घटित हुआ। 1970 के दशक में डॉक्टर टाइप 1 मधुमेह वाले लोगों के रक्त में स्वप्रतिपिंड नामक प्रोटीन का पता लगाने के तरीकों का परीक्षण कर रहे थे। इन प्रोटीनों की उपस्थिति ने स्वयं की प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा ही हमले की ओर इंगित किया। नया परीक्षण सफल रहा और पहली बार इस बात की पुष्टि हुई कि टाइप 1 एक स्वप्रतिरक्षित (ऑटोइम्यून) बीमारी है, जिसमें अग्नाशयी आइलेट्स की इंसुलिन पैदा करने वाली कोशिकाएं शरीर की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा नष्ट कर दी जाती हैं।

अपने अध्ययन के हिस्से के रूप में, वैज्ञानिकों ने सामान्य आबादी में और टाइप 2 मधुमेह के रोगियों में समान स्वप्रतिपिंडों की खोज की (जो एक स्वप्रतिरक्षी रोग नहीं है)।

ये स्वप्रतिपिंड सामान्य आबादी में अनुपस्थित थे, लेकिन वैज्ञानिकों को आश्चर्य हुआ जब उन्होने पाया कि स्वप्रतिपिंड (एंटीबॉडीज) टाइप 2 के निदान वाले लगभग 10 प्रतिशत व्यक्तियों में यह मौजूद थी, जबकि ये लोग समझ रहे थे यह नहीं हैं।

इससे पता चलता है कि टाइप 2 मधुमेह वाले लोगों से उनके लक्षणों में कोई स्पष्ट अंतर नहीं होने के बावजूद, रोगियों की एक उपश्रेणी थी जिन्हें अब लाडा के रूप में निदान किया जा सकता है।

हालाँकि 1993 तक इसे आधिकारिक रूप से मान्यता नहीं मिली थी, तब तक इसका उपयोग वयस्कों में होने वाली धीमी-शुरुआत टाइप 1 ऑटोइम्यून मधुमेह का वर्णन करने के लिए किया जाता था। इस खोज के बाद यह निश्चित रूप से मान लिया गया कि गैड (GAD) ऑटोएंटीबॉडी टाइप 1 मधुमेह की विशेषता थी न कि टाइप 2 मधुमेह की।

मधुमेह के प्रकार

चिकित्सकीय रूप से मधुमेह को मोटे तौर पर निम्न प्रकारों में विभाजित किया जा सकता है

मधुमेह के प्रकारविशेषताएं
टाइप 1मुख्य रूप से इंसुलिन की कमी के परिणामस्वरूप अग्नाशयी बीटा कोशिका के विनाश का परिणाम है। ऑटोइम्यून प्रक्रिया हैं लेकिन हेतु विज्ञान (ईटियोलॉजी) अस्पष्ट हैं। केटोएसिडोसिस अधिक सामान्य
टाइप 2मुख्य रूप से इंसुलिन प्रतिरोध और सापेक्ष इंसुलिन की कमी। केटोएसिडोसिस असामान्य
गर्भावधिग्लूकोज असहिष्णुता पहली बार गर्भावस्था के दौरान पहचानी गई
अन्यमधुमेह के विशिष्ट रूप या तो आनुवंशिक रूप से परिभाषित, अन्य बीमारियों के कारण, दवा से प्रेरित

अव्यक्त ऑटोइम्यून मधुमेह के लक्षण और लक्षण क्या हैं?

लाड़ा के शुरुआती लक्षणों में शामिल हैं:

  • हर समय थकावट महसूस करना, विशेष रूप से खाने के बाद थकान
  • भ्रम और सिर में हल्कापन
  • भोजन के बाद भूख लगना।

जैसे-जैसे लाड़ा विकसित होता है, व्यक्ति की इन्सुलिन बनाने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है, जिसके परिणामस्वरूप निम्न लक्षण दिखाई देते हैं:

  • धुंधली दृष्टि
  • हाथों और पैरो में झुनझुनी और दर्द ,
  • बार-बार पानी पीना (पॉलीडिप्सिया),
  • बार-बार पेशाब आना (पॉलीयूरिया),

इन लक्षणों को जल्द से जल्द पकड़ना महत्वपूर्ण है क्योंकि निदान में देरी से मधुमेह की जटिलताएं विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है।

हाथों में जलन और दर्द होना न्यूरोपैथी (तंत्रिका रोग) का संकेत हो सकता है। यदि यह लक्षण नियमित रूप से और अन्य लक्षणों के साथ होता है, तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेने की सलाह दी जाती है।

अव्यक्त ऑटोइम्यून मधुमेह के परिणाम या जटिलताएं क्या हैं?

लाडा की अल्पकालिक जटिलता

मधुमेह केटोएसिडोसिस - विशेष रूप से एक बार जब अग्न्याशय ने इंसुलिन बनाने की अपनी क्षमता खो चुका होता है।

लाडा वाले लोगों को केटोएसिडोसिस के लक्षण और लक्षणों के बारे में पता होना चाहिए और यदि आवश्यक हो तो केटोन्स के लिए स्वयं परीक्षण करना आना चाहिये।

दीर्घकालीन जटिलताएं

लाडा की दीर्घकालिक जटिलतायें टाइप 1 और टाइप 2 मधुमेह वाले व्यक्तियों के समान ही होंगी।

लाडा की विभिन्न दीर्घकालिक जटिलताओं में निम्नलिखित शामिल हैं-

  • हृदय रोग और स्ट्रोक,
  • नेफ्रोपैथी (गुर्दे की बीमारी)
  • मधुमेह रेटिनोपैथी (नेत्र रोग)
  • न्यूरोपैथी (तंत्रिका रोग)
  • पैर की समस्यायें।

आप अव्यक्त स्वप्रतिरक्षी मधुमेह का निदान कैसे करते हैं?

  • अक्सर लक्षणों की समानता होने के कारण लाडा का निदान पहली बार में नहीं हो पाता है। सामान्य तरीकों (मूत्र और रक्त शर्करा परीक्षण) के माध्यम से टाइप 2 मधुमेह होने का निदान किया जाता हैं।
  • यदि चिकित्सक को कोई संदेह है कि टाइप 2 मधुमेह का प्रारंभिक निदान गलत हो सकता है तो इस स्थिति में लाडा हैं या नहीं इसका पता लगाना आवश्यक हो जाता है।
  • हाल ही में निदान किए गए रोगियों में जिन्हे इंसुलिन की आवश्यकता नहीं है या मौखिक एंटीडायबिटिक दवाईयों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं हो रही हो तो उन रोगियों में अग्नाशयी स्वप्रतिपिंडों के ऊंचे स्तर की जाँच कर के लाडा की उपस्थिति की पुष्टि की जाती है। इन स्वप्रतिपिंडों की उपस्थिति को मापने के लिए एक जीएडी एंटीबॉडी परीक्षण किया जाता है। ये एंटीबॉडी न केवल लाडा की उपस्थिति का निदान करते हैं, बल्कि यह भी अनुमान लगा सकते हैं कि इंसुलिन पर निर्भर बनने की दिशा में प्रगति की दर क्या हैं या कितने समय में मधुमेही इंसुलिन पर निर्भर हो जायेगा।
  • एक और परीक्षण जो किया जा सकता है वह है सी-पेप्टाइड परीक्षण। हालांकि, प्रारंभिक चरण लाडा मधुमेहीयों में सी-पेप्टाइड परीक्षण हमेशा निर्णायक नहीं हो सकते हैं।

टाइप 2 मधुमेह के बजाय लाडा का सुझाव देने के लिए नैदानिक सुझाव

  • मेटाबॉलिक सिंड्रोम के लक्षणों कीअनुपस्थिति जैसे मोटापा, उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल का स्तर,
  • मौखिक एंटीडायबिटिक एजेंटों का उपयोग करने के बावजूद भी अनियंत्रित हाइपरग्लेसेमिया,
  • अन्य ऑटोइम्यून स्थितियों की घटना (ग्रेव्स रोग और एनीमिया)। टाइप 1 मधुमेह या लाडा का प्रबंधन बाहरी इंसुलिन के प्रशासन से किया जा सकता हैं। इसका काम ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करना है। नियंत्रित ग्लूकोज का स्तर बीटा कोशिकाओं के आगामी नुकसान के विनाश को रोकता है। मधुमेह की जटिलताओं का जोखिम में कमी करना हैं और मधुमेह केटोएसिडोसिस (डीकेए) से मृत्यु को रोकना है।

अव्यक्त ऑटोइम्यून मधुमेह का इलाज कैसे कर सकते हैं?

टाइप 1 मधुमेह या लाडा का प्रबंधन बाहरी इंसुलिन के प्रशासन से किया जा सकता हैं। इसका काम

  • ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करना है। नियंत्रित ग्लूकोज का स्तर बीटा कोशिकाओं के आगामी नुकसान के विनाश को रोकता है।
  • ममधुमेह की जटिलताओं का जोखिम में कमी करना हैं और मधुमेह केटोएसिडोसिस (डीकेए) से मृत्यु को रोकना है।

हालांकि लाडा शुरू में टाइप 2 मधुमेह के समान उपचार (जीवन शैली और दवाएं) पर अनुकूल प्रतिक्रिया दे सकता है, लेकिन अंततः लाडा वाले लोग इंसुलिन पर निर्भर हो जाते है। क्योंकि रूढ़िवादी उपाय या मौखिक दवाईयाँ रोग की प्रगति को कम करने या रोकने में विफल रहते हैं।

कुछ मामलों में, इंसुलिन थेरेपी को टाला जा सकता है। हालांकि शोध के सबूत बताते हैं कि लाडा के निदान के तुरंत बाद इंसुलिन उपचार शुरू करने से अग्न्याशय के इंसुलिन उत्पादन के कार्य को बेहतर ढंग से संरक्षित करने में मदद मिलती हैं।

लाडा के लोगों को टाइप 1 मधुमेहीयों की तरह नियमित रक्त शर्करा परीक्षण की सलाह दी जाती है। इन को प्रत्येक भोजन से पहले और बिस्तर पर जाने से पहले रक्त शर्करा के स्तर का परीक्षण करने की सलाह दी जाती है।

अव्यक्त ऑटोइम्यून मधुमेह को कैसे रोक सकते हैं?

लाडा टाइप 1 मधुमेह को रोकने का कोई तरीका या उपाय ज्ञात नहीं है। हालांकि कुछ वैज्ञानिक यह मानते हैं कि प्रारंभिक चरण में प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा अग्न्याशय के इंसुलिन उत्पादक कोशिकाओं को नष्ट करने से पहले ही यदि लाडा का निदान कर उपचार किया जाये तो लाडा को रोक सकते हैं।

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