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गर्भकालीन मधुमेह

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गर्भकालीन मधुमेह का निदान

सभी गर्भवती महिलाओं को कुछ बुनियादी जांच से गुजरना पड़ता है जैसे कि नियमित मूत्र परीक्षण, अल्ट्रासाउंड, के लिए रक्त परीक्षण: हीमोग्लोबिन, सिफलिस जैसे संक्रमणों के लिए। यह परीक्षण महिला के समग्र स्वास्थ्य को सुनिश्चित करता हैं। मधुमेह की जांच के लिए आमतौर पर उपवास और प्रसवोत्तर रक्त शर्करा की जांच की जाती है। पहली तिमाही में और बाद में दूसरी तिमाही में भी गर्भवती महिला की प्रारंभिक जांच के हिस्से के रूप में स्क्रीनिंग की जाती है।

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यदि रक्त का स्तर अधिक है, तो ग्लूकोज सहिष्णुता परीक्षण द्वारा इसकी पुष्टि की जाती है। इस टेस्ट में उपवास र ब्लड ग्लूकोज की जांच की जाती है और फिर गर्भवती महिला को 100 ग्राम ग्लूकोज युक्त ग्लूकोज का घोल कर पिलाया जाता है। इसके बाद 1 घंटे, 2 घंटे और 3 घंटे के अंतराल पर एक बार फिर ब्लड ग्लूकोज की जांच की जाती है। रक्त शर्करा के स्तर के आधार पर यह तय किया जाता है कि महिला को गर्भकालीन मधुमेह हैं या नहीं।

मधुमेह के निदान के लिए अन्य अतिरिक्त जांच हैं -

  • HbA1C जो पिछले 3 महीनों में मधुमेह की स्थिति के बारे में बताता है
  • गुर्दे की कार्य क्षमता परीक्षण
  • यदि मूत्र पथ के संक्रमण का संदेह है, तो मूत्र परिक्षण
  • भ्रूण के स्वास्थ्य का आंकलन करने के लिए अल्ट्रासाउंड।

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