विषय में

मधुमेह दुनिया की लगभग 30% आबादी को प्रभावित करता है और इसे दो प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है: टाइप 1 और टाइप 2। आमतौर पर टाइप 1 को किशोर मधुमेह कहा जाता है और अक्सर आनुवंशिकता से जुड़ा होता है और टाइप 2 को वयस्कों में मधुमेह के शुरुआती रूप में जाना जाता है। उच्च रक्त शर्करा की विशेषता है कि यह अक्सर उन लोगों को होता हैं, जो अधिक वजन वाले होते हैं या जो अपने आहार का ठीक से ध्यान नहीं रखते हैं।

मधुमेह से कई जटिलताएं जुड़ी होती हैं। मधुमेह संवहनी प्रणाली को बाधित करता है, जिससे शरीर के कई क्षेत्रों जैसे आंखें, गुर्दे, पैर और पैर प्रभावित होते हैं। मधुमेही लोगों को अपने पैरों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

मधुमेह न्यूरोपैथी - विश्व की ३०% जनसंख्या मधुमेह से पीड़ित हैं, उनमें से ७५% को इस रोग से संबंधित पैर की समस्यायें विकसित हो जाती हैं। पैरों की यह स्थिति खराब परिसंचरण और मधुमेह न्यूरोपैथी संयोजन से विकसित होती है, जिस से असंवेदनशीलता या दर्द, गर्मी और ठंड को महसूस करने की क्षमता समाप्त या बहुत कम हो जाती है। न्यूरोपैथी से पीड़ित मधुमेहियों को मामूली कट, खरोंच, फफोले या दबाव-घाव (प्रेशर-सोर) हो सकते हैं, जिनके बारे में उन्हें असंवेदनशीलता के कारण पता नहीं चलता है। यदि इन मामूली चोटों का समय पर इलाज नहीं किया जाये तो जटिल समस्यायें हो जाती हैं और फोड़े और कभी-कभी पैरो के उस भाग का विच्छेदन भी हो सकता है। न्यूरोपैथी से गोखरू, हैमर टोज और चारकोट फीट जैसी विकृति भी पैदा हो सकती है।

हैमर टोज यह एक विकृति हैं जिसमें पैर की उंगलियाँ सामने की ओर उठी हुई न होकर नीचे की ओर मुड़ जाती हैं।
चारकोट फुट/ज्वाइंट को न्यूरोपैथिक ज्वाइंट या चारकोट (न्यूरो/ऑस्टिओ) आर्थ्रोपैथी) और भारत में इसे पत्थर पांव भी कहा जाता है। चारकोट फुट की समस्या में एक या दोनों पांव हो सकती है। इसमे पैरों की हड्डीयाँ कमजोर हो कर टूट भी सकती हैं। इस अवस्था में पैर सुन्न होता है, ऐसे में पांव में फ्रैक्चर और अन्य समस्याओं के कारण होने वाले दर्द या असुविधा के बारे में व्यक्ति को पता भी नहीं चलता कि उसके पैर के साथ कुछ गलत हो गया है। ऐसे में खड़े होने और चलने से व्यक्ति के पैर की हड्डियों को और भी ज्यादा नुकसान पहुंचता है। विकार के कारण पांव का आकार पूरी तरह बदल जाता है। तलवे का छोर पथरीला दिखने लगता है। चारकोट फुट के कारण पैर में घाव भी हो जाते हैं, जो आसानी से नहीं भरते। यदि इसका इलाज नहीं किया गया तो आगे चलकर यह समस्या गंभीर अपंगता, टेढ़े-मेढ़ें पांव के साथ अंग विच्छेदन का कारण बन सकती है।

मधुमेह के रोगियों के लिए पैर से संबंधित सभी चोटों को रोकने के लिए आवश्यक सावधानी बरतना बहुत महत्वपूर्ण है। न्यूरोपैथी के परिणामों से बचने के लिये पैरों का दैनिक निरीक्षण करना आवश्यक है। जब एक मधुमेही पैरों के लिये आवश्यक निवारक उपाय करता है, तो वह भविष्य में होने वाली गंभीर जोखिम को कम कर देता है।

खराब परिसंचरण - मधुमेह अक्सर परिधीय संवहनी रोग का कारण बनता है, जो व्यक्ति के रक्त संचारण को रोकता है। इस स्थिति में, धमनियों का संकुचन होता है, जिससे अक्सर पैरों और पैरों के निचले हिस्से में परिसंचरण में काफी कमी आती है। खराब परिसंचरण त्वचा और अन्य ऊतकों को आपूर्ति की जाने वाली ऑक्सीजन और पोषण की मात्रा को कम करके, मधुमेह के पैर की समस्याओं में योगदान देता है, जिससे चोटों को ठीक नहीं किया जा सकता है। खराब परिसंचरण से पैर में सूजन और सूखापन भी हो सकता है। मधुमेह रोगी के लिए पैर की जटिल समस्याओं को रोकना अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि खराब परिसंचरण उपचार प्रक्रिया को बाधित करता है और अल्सर, संक्रमण और अन्य गंभीर स्थिति को पैदा कर सकता है।

Post a Comment

Comments should be on the topic and should not be abusive. The editorial team reserves the right to review and moderate the comments posted on the site.



Medindia Newsletters

Subscribe to our Free Newsletters!

Terms & Conditions and Privacy Policy.