डायबिटिज आहार योजना के लक्ष्य

डायबिटिज आहार योजना का प्रमुख लक्ष्य हैं कि कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा का कैलोरी के अनुसार एक उचित मिश्रण कर के, आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करने के साथ-साथ हर दिन में, हर भोजन में ग्लूकोज की मात्रा रक्त में समान रूप से रखना हैं।

डायबिटिज रोगियों को हमेशा अपने भोजन में क्या खाना हैं, इसके बारे में ध्यान रखना जरूरी हैं क्योंकि सभी खाद्य पदार्थों में केवल कार्बोहाइड्रेट ही नहीं बल्कि कुछ ऊर्जा के गुण भी होते हैं।

1. कार्बोहाइड्रेट
2. रेशेदार या फाइबर
3. प्रोटीन
4. वसा
5. नमक का सेवन
6. शराब का उपभोग

कार्बोहाइड्रेट
वसा और प्रोटीन की तुलना में, कार्बोहाइड्रेट का रक्त शर्करा पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता हैं। भोजन के बाद रक्त शर्करा के स्तर में वृद्धि, कार्बोहाइड्रेट पाचन से ग्लूकोज के अवशोषित‍ होने और लीवर द्वारा ग्लूकोज के उत्पादन में वृद्धि के कारण होती हैं। साक्ष्यक अब बताते हैं कि विशिष्ट प्रकार के खाद्य पदार्थो के बजाय कार्बोहाइड्रेट की कुल मात्रा हैं जो सबसे ज्यादा रक्त शर्करा को प्रभावित करती हैं। कार्बोहाइड्रेट या तो जटिल होते हैं जैसे कि स्टार्च में या सरल जैसे कि फल और शक्कर में। एक ग्राम कार्बोहाइड्रेट चार कैलोरी के बराबर हैं। वर्तमान सामान्य चलन के अनुसार प्रतिदिन 50-60% के बीच कैलोरी की मात्रा में कार्बोहाइड्रेट लेना चाहिए। स्टार्च-वाले खाद्य पदार्थ जैसे कि पास्ता, सफेद-आटे के पदार्थो और आलू की तुलना में, साबूत अनाज और सब्जियों में पाए जाने वाले जटिल कार्बोहाइड्रेट को वरीयता दी जाती हैं।

रेशा या फाइबर
फाइबर कई जटिल कार्बोहाइड्रेट का एक महत्वपूर्ण घटक हैं। यह लगभग हमेशा पौधों, विशेष रूप से सब्जियों, फलों, साबुत अनाजों, मेवों और फलियों (बीन्स और मटर) में पाये जाते हैं। अध्ययन से पता चलता हैं कि साबुत अनाज से समृद्ध रेशे या फाइबर आहार टाइप2 मधुमेह के जोखिम को कम करते हैं। फाइबर के स्तोत्र में मुख्यत: साबुत अनाज, ब्रैड, भूरा चावल और चोकर शामिल हैं।

प्रोटीन
विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि प्रतिदिन के भोजन में कैलोरी का 12-20%, प्रोटीन द्वारा प्रदान किया जाना चाहिए। कुछ लोगों का मानना हैं कि गर्भवती महिलाओं को छोड कर मधुमेह से प्रभावित लोगों को उनके आदर्श शरीर के वजन के प्रत्येक पाउंड के लिए लगभग 0.4 ग्राम प्रोटीन दिया जाना चाहिए, जो दैनिक कैलोरी का लगभग 10% हैं। एक ग्राम प्रोटीन 4 कैलोरी प्रदान करता हैं । रात में रक्त शर्करा का सामान्य स्तर बनाए रखने के लिए आमतौर पर सोने से पहले नाश्ता करने की सलाह दी जाती हैं।
क्या इससे रात के समय होने वालीहाइपोग्लाइसीमिया के विरुद्ध कोई सुरक्षात्मक लाभ मिलते हैं या नहीं?
एक अध्य‍यनानुसार परिणाम मिले जुले हैं। यदि ऐसा होता हैं तो रक्त शर्करा के स्तर को स्थिर रखने के लिए केवल 14 ग्राम मात्रा की ही आवश्यकता होती हैं।

वसा
वसा का एक ग्राम नौ कैलोरी प्रदान करता हैं। शरीर में कोलेस्ट्रॉल का लगभग दो-तिहाई हिस्सा भोजन में से उत्पन्न नहीं होता बल्कि यकृत या लीवर द्वारा निर्मित होता हैं, इसका उत्पादन सेच्यूरेटेड वसा (ज्यादातर पशु उत्पादनों में पाये जाते हैं) द्वारा प्रेरित होता हैं। कोलेस्ट्रॉल आहार-योजना के प्रबंधन के लिए सबसे पहले वसा और तेलों को समझना जरूरी हैं।

भोजन के माध्यम से कोलेस्ट्रॉल के स्तर को प्रबंधित करने मेंसंतृप्त वसा और ट्रांस-फैटी एसिड की खपत कम करना पहला जरूरी कदम है। सेच्‍यूरेटेड वसा प्रमुख रूप से पशु उत्पादनों में पाए जाते हैं, जिनमें मांस और डेयरी पदार्थ भी शामिल होते हैं। ये अत्यधिक उच्च कोलेस्ट्रॉल के स्तर से जुड़े रहते हैं। ट्रांस-फैटी एसिड हाइड्रोजनीकरण नामक प्रक्रिया के दौरान निर्मित किया जाता हैं, जिनका उद्देश्य पॉलीअनसैचुरेटेड तेलों को बदबूदार होने से रोकना और उन्हें कमरे के तापमान पर ठोस बनाए रखना हैं। पॉली अनसेचुरेटेड वसा कुसुम, सूरजमुखी, मक्का और कपास के तेल और मछली में पाए जाते हैं।

वसा युक्त खाद्य पदार्थों का उपभोग कम करें - पनीर, मक्खन और दूध, डेयरी उत्पादन।

स्वस्थ वसा में असंतृप्त वसा शामिल हैं, जो पौधों, मछली और कमरे के तापमान वाले तरल पदार्थों (मोनोअनसैचुरेटेड वसा) में उपलब्ध होते हैं। यह ज्यादातर जैतून, कैनोला और मूंगफली के तेल और अधिकांशस सूखे मेवों में मौजूद होते हैं। ओमेगा-3 फैटी एसिड भी स्वास्थ्य के लिए काफी सहायक हैं।

नमक का सेवन
नमक का सीमित मात्रा में उपयोग करें। उच्च रक्तचाप और अधिक मात्रा में नमक का सेवन यह दोनो एक दूसरे से संबंधित हैं। प्रतिदिन 3000 मिलीग्राम से अधिक सोडियम सेवन का ना करें। उच्च रक्त चाप वालों को, प्रतिदिन केवल 2400 मिलीग्राम लेना चाहिए या फिर चिकित्सक की सलाहानुसार सोडियम के सेवन को सीमित करें।

शराब का उपभोग
संयमित मात्रा में शराब का सेवन करना चाहिए। पुरुषों के लिए प्रतिदिन अधिकतम तीन यूनिट और महिलाओं के लिए दो यूनिट की सलाह दी जाती हैं।
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