रक्त ग्लूकोज़ की जांच

इन्सुलिन से उपचारित रोगियों के लिए दैनिक रक्त शर्करा की निगरानी की सलाह दी जाती है।

टाइप-1, टाइप-2 या गर्भकालीन मधुमेह वाले सभी व्यक्तिों को अपने रक्त शर्करा के स्तर पर नज़र रखनी चाहिए। साथ ही, जिन लोगों को मधुमेह की जटिलताएं हैं, उन्हें अपने रक्त शर्करा के स्तर की निगरानी अधिक करनी चाहिए।

दैनिक निगरानी की आवृत्ति कितने बार हो, यह मधुमेह के प्रकार और उसके उपचार के तरीके पर निर्भर करती है -

  • नये मधुमेह के रोगीयों को जो पर्याप्त शारीरिक गतिविधि के साथ, नियंत्रित आहार पर हैं, उन्हें 2-3 सप्ताह में, एक बार अपने रक्त ग्लूकोज की जांच करनी चाहिए।
  • जो लोग मौखिक कम रक्त शर्करा वाली दवाईयों (हाइपोग्लाइसेमिक एजेंटों) (ओ.एच.ए) पर हैं, उन्हें 8-10 दिनों में एक बार रक्त ग्लूकोज की जांच करनी चाहिए।
  • टाइप-1 या टाइप-2 मधुमेह वाले लोग जो इंसुलिन पर हैं उन को हर 3 दिनों में एक बार रक्त शर्करा के स्तर की जांच करनी चाहिए।
  • जिन लोगों को गर्भावधि मधुमेह या प्री-जेस्टेशनल डायबिटीज है उन्हें दिन में 1-2 बार ग्लूकोज रीडिंग की जांच करनी होती है।
  • क्योंकि इन लोगों की इंसुलिन की खुराक अंतिम ग्लूकोज रीडिंग के आधार पर कम ज्यादा होती हैं।
  • सर्जरी या कुछ प्रक्रियाओं से गुजरने वालों को भी दिन में 3-4 बार इसकी जांच करनी चाहिए। यह ज्यादातर अस्पताल में किया जाता है।
  • यदि कोई हाइपोग्लाइसीमिया का अनुभव कर रहा है, तो हमेशा एक अतिरिक्त परीक्षण किया जाना चाहिए।
  • स्वास्थ्य देखभाल टीम को चाहिये कि यदि दवाओं में बदलाव किया जाता है या अतिरिक्त परीक्षणों को करने की आवश्यकता हैं तो रोगी को सूचित किया जाना चाहिये।
  • मध्यरात्रि परीक्षण (2.00-3.00 पूर्वाह्न) उन लोगों के लिए सुझाया जाता है जिनमें रात में निम्न रक्त शर्करा और सुबह उठने के समय उच्च रक्त शर्करा के स्तर की प्रवृत्ति होती है।

एक व्यक्ति जितनी बार रक्त शर्करा के स्तर की जांच करेगा, नियंत्रण उतना ही बेहतर होगा। हालाँकि, ये जाँच इस बात पर भी निर्भर करती है कि कोई व्यक्ति कितनी बार स्वेच्छा से खुद को सुई चुभा सकता है और परीक्षण पर खर्च करने की क्षमता पर भी निर्भर होता हैं। क्योंकि एक परीक्षण पट्टी की कीमत लगभग 25 रुपये है। कभी-कभी किसी व्यक्ति का कार्यक्रम बहुत व्यस्त होता हैं, जिससे वे बार-बार परीक्षण नहीं कर पाते है। यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि कड़ी जाँच और निगरानी ही ग्लूकोज के स्तर के नियंत्रण का पता लगाने और सही दवा सुनिश्चित करने का एकमात्र तरीका है। शरीर में शर्करा के स्तर की निगरानी के लिए अन्य दूसरे तरीकों की खोज अब तक विफल रही हैं।

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