मधुमेह - केटोन स्ट्रिप

जिनके शरीर में इंसुलिन का निर्माण नहीं हो रहा हैं ऐसे टाइप I मधुमेह वालो के लिए यह बहुत जरूरी हैं । इंसुलिन के कम होने के कारण उनका शरीर कार्बोहाइड्रेट का उपयोग नहीं कर सकता, जो कि ऊर्जा का मुख्य स्रोत हैं। ऐसी स्थिति में, शरीर तब संग्रहित वसा से ऊर्जा प्राप्त करने का प्रयास करता हैं। इंसुलिन की अनुपस्थिति में वसा का टूटना शरीर में ‘केटोन (अम्लतरक्तता)'का निर्माण करता हैं और इस स्थिति को किटोसिस कहा जाता हैं। किटोसिस के विशिष्ट लक्षण मतली, उल्टी, सांस से फल की गंध आना और निर्जलीकरण हैं।

केटोन स्ट्रिप्स एक बोतल में उपलब्ध हैं, जिन पर विभिन्न रंग के कोड़ चिन्हित होते हैं। प्रत्येक रंग केटोन्स की मात्रा कितनी हैं यह दर्शाते हैं। यदि ऊपरोक्त वर्णित लक्षणों में से कोई एक भी लक्षण पाया जाये तो, एक केटोन स्ट्रिप को मूत्र में डुबो कर, स्ट्रिप के रंगीन हिस्से में होने वाले परिवर्तन को देखकर अम्लतरक्तता(केटोन्स) की जांच की जा सकती हैं। पेशाब में केटोन पाए जाने पर स्वास्थ्य देखभाल सेवा टीम को तुरंत सूचित करके उपचार प्राप्त करना अति आवश्यक हैं।

टाइप I मधुमेह वाले बच्चे, जिन्हें दिन में कई बार इंजेक्शन या इंसुलिन पंप पर रखा जाता हैं उनके लिये यह स्ट्रिप्स बहुत आवश्यक हैं। यदि किसी कारणवश पंप काम करना बंद कर दे, ठंड या बीमारी के दौरान जब शरीर कोशिकाऐ इंसुलिन का तेजी से उपयोग करने लगती हैं, तब इंसुलिन की उच्च खुराक लेने की आवश्यकता हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में तत्काल निर्णय लेने में यह बहुत उपयोगी सिद्ध होती हैं ।
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